अलान देवीन
जिन्को बाइलोबा
पूरब के एक पेड़ का यह पत्ता,
मेरी बगिया में आ गिरा है।
एक भेद खोल रहा है,
जो उत्साह से भर देता है मुझे
और विचारशील लोगों को।
क्या यह दर्शाता है उस एक जीवित सृष्टि को
जिसने स्वयं को कर लिया है विभाजित?
या ये दो हैं; जिन्होंने तय किया है कि
उन्हें एक होना चाहिए?
ऐसे प्रश्न का मिल गया है
मुझे सही जवाब।
तुमने क्या मेरे गीतों और कविताओं
में देखा है
कि मैं एक हूँ और दो भी?
—योहान फ़ौफ़गौंग फॉन गूटे
लुप्तप्राय प्रजातियाँ
जिन्को को अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) द्वारा जारी की गई पौधों की संकटग्रस्त जातियों की लाल सूची में शामिल किया गया है।
हिरोशिमा - बमबारी से प्रभावित जिन्को
6 अगस्त 1945 को अमेरिका ने द्वितीय विश्वयुद्ध के अंत में हिरोशिमा पर एक परमाणु बम गिराया था। सितंबर 1945 में परमाणु बम गिरने के स्थान के आस-पास के पेड़-पौधों का अध्ययन किया गया।
विस्फोट के केंद्र से 1.1 किलोमीटर की दूरी पर एक मंदिर के पास जिन्को का एक पौधा लगा था। हालाँकि विस्फोट के बाद वह मंदिर नष्ट हो चुका था पर जिन्को के पौधे पर कलियाँ खिल रही थीं और उसका कुछ खास बिगड़ा नहीं था। परमाणु बमबारी झेल चुके जिन्को के छह पौधे अभी भी जीवित हैं।
इसलिए इस पौधे को ‘आशा का वाहक’ माना जाता है।

अलान देवीन
अलान अमेरेंको के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं जो एक पुनर्योजी कंपनी है। इससे पहले उन... और पढ़ें
