ईशु शिवा भारत में अनेक महिलाओं को मासिक-धर्म संबंधी स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित और स्थायी तरीकों एवं उत्पादों को उपलब्ध करवाकर उनके दैनिक जीवन में क्रांति ला रही हैं। करिश्मा देसाई द्वारा लिए गए इस साक्षात्कार में ईशु बता रही हैं कि कैसे वे मासिक-धर्म के प्रति कलंक की भावना को हटा रही हैं और प्रतिबंधों से महिलाओं को मुक्त कर स्वस्थ तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
प्रश्न - ईशु, हार्टफुलनेस पत्रिका की ओर से आपका स्वागत है। आज आपके साथ बातचीत करके हमें बहुत खुशी हो रही है। मासिक-धर्म स्वास्थ्य के क्षेत्र में आपका काम बहुत प्रगति कर रहा है और हम आपकी इस यात्रा और आपके संगठन सैनिट्री (Sanitree) के प्रभाव के बारे में विस्तार से जानने के लिए उत्सुक हैं। यहाँ आने के लिए आपका धन्यवाद।
धन्यवाद, करिश्मा। मुझे अपनी कहानी सुनाने में बहुत खुशी हो रही है और मुझे उम्मीद है कि इससे और लोग भी हमारे इस कार्य के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे।
प्रश्न - तो चलिए! हम शुरुआत से प्रारंभ करते हैं। क्या आप हमें सैनिट्री शुरू करने के पीछे की कहानी बताएँगी? वह कौन सी प्रेरणा थी जिसने आपको मासिक-धर्म स्वास्थ्य पर केंद्रित एक संगठन बनाने के लिए प्रेरित किया?
मेरी यह यात्रा बचपन में मेरे मासिक धर्म शुरू होने से पहले ही हो गई थी। मैं भाग्यशाली थी कि मुझे एक गैर-सरकारी संगठन में काम करने वाले लोगों से मासिक-धर्म के बारे में शिक्षा प्राप्त हुई जो मेरे स्कूल में आए थे। इस ज्ञानवर्धक अनुभव ने मेरे लिए मासिक-धर्म के रहस्य को उजागर किया। लेकिन जब मैं राजस्थान वापस आई तो इस बारे में लोगों के रवैये में एक बड़े अंतर को देखकर मैं दंग रह गई। वहाँ मासिक-धर्म एक वर्जित विषय था जिसके बारे में लोगों में कलंक की भावना और गलत धारणाएँ भरी हुईं थी। यही बात एक गैर सरकारी संगठन शुरू करने के लिए मेरी प्रेरणा थी। हम राजस्थान में सार्वजनिक स्थानों और सरकारी स्कूलों में लड़कियों और लड़कों को मासिक-धर्म के बारे में खुलकर शिक्षित करने वाले प्रथम लोगों में से थे। हमारा लक्ष्य इस बारे में मौन को तोड़ना और स्वस्थ तरीकों को बढ़ावा देना था।
प्रश्न - यह बहुत ही प्रेरणादायक शुरुआत है। क्या आप अपनी सफलता की कोई घटना बता सकती हैं जो आपके कार्य के महत्व की पुष्टि करती हो?
एक घटना मुझे विशिष्ट रूप से याद आती है - एक ग्रामीण समुदाय की महिला थी जो खराब गुणवत्ता वाले सैनिटरी पैड का उपयोग कर रही थी। उस वजह से उसे एलर्जी और चकत्ते हो गए थे, इसलिए मासिक-धर्म उसके लिए एक अभिशाप बन गया था। उसके लिए वह एक दर्दनाक और असुविधाजनक अनुभव था जिसके कारण वह हर महीने डरी रहती थी।
हमारे एक शैक्षिक सत्र में भाग लेने के बाद वह अपने मासिक-धर्म स्वास्थ्य पर ध्यान देने के लिए प्रेरित हुई। उसने डॉक्टर से सलाह ली, उचित दवा ली और हमारे कपड़े के पैड का उपयोग करना शुरू कर दिया। उसे वे आरामदायक और धोने में आसान लगे। इस बदलाव ने उसके

अनुभव को परिवर्तित कर दिया। मासिक-धर्म फिर उसके लिए कोई अभिशाप नहीं था बल्कि एक प्राकृतिक प्रक्रिया थी जिसे वह आराम से संभाल सकती थी। यह शिक्षा की शक्ति और आसानी से प्राप्त सुरक्षित मासिक-धर्म उत्पाद का प्रमाण है।
(हमारा मानना है कि मासिक-धर्म स्वास्थ्य को बढ़ावा देना हमारी धरती के लिए हानिकारक नहीं होना चाहिए।)
प्रश्न – सैनिट्री वहनीयता के लिए प्रतिबद्ध है। क्या आप किसी ऐसे नए तरीके के बारे में बता सकती हैं जिसे आपने पर्यावरण के अनुकूल तरीकों और उत्पादों को एकीकृत करने में अपनाया हो?
सैनिट्री में हम जो कुछ भी करते हैं उसके केंद्र में वहनीयता ही है। हमारा मानना है कि मासिक-धर्म स्वास्थ्य को बढ़ावा देना हमारी धरती के लिए हानिकारक नहीं होना चाहिए। हमने अपने इस कार्य के हर पहलू में पर्यावरण के अनुकूल तरीकों को शामिल किया है।
हम कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए अपनी सामग्री को स्थानीय स्रोत से ही प्राप्त करते हैं। हमारे उत्पाद महिलाओं द्वारा मशीनों का न्यूनतम उपयोग करके बनाए जाते हैं जो ऊर्जा की खपत को कम करने के साथ-साथ स्थानीय रोज़गार को भी बढ़ावा देते हैं। हम अपने उत्पादों को पर्यावरण के अनुकूल पैकेट में पैक करते हैं ताकि कचरा कम हो और पुनरोपयोग को बढ़ावा मिले।
हमारे कपड़े के पैड प्राकृतिक तरीके से आसानी से नष्ट होने वाले (biodegradable) हैं और दो साल तक चलते हैं। ये डिस्पोज़ेबल (एक बार उपयोग के बाद फेंक देने वाले) पैड की तुलना में कचरे को काफ़ी कम करते हैं। प्रत्येक डिस्पोज़ेबल पैड में चार शॉपिंग की पॉलीथिन थैलियों के बराबर प्लास्टिक होता है। भारत में लगभग 12.1 करोड़ महिलाएँ डिस्पोज़ेबल सैनिटरी पैड का उपयोग करती हैं और हर साल लगभग 12 अरब पैड फेंके जाते हैं। इन 12 अरब पैड को नष्ट होने में 500 से 800 साल लगेंगे। ये भारत के पर्यावरण और पृथ्वी के भविष्य को नुकसान पहुँचा रहे हैं। हमारे पैड का उपयोग करने वाली प्रत्येक महिला दो वर्षों के दौरान लगभग 600 डिस्पोज़ेबल पैड को कचरे के ढेर में जाने से रोक सकती है। हमें अपने प्रयासों के लिए यू.के. और भारत में कई वहनीयता संबंधी पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है जिसके लिए हम अत्यधिक गर्व महसूस करते हैं।
प्रश्न - यह सचमुच सराहनीय है। मासिक-धर्म संबंधी बहुत-सी गहरी पाबंदियां और गलत धारणाएँ हैं, तो ऐसे में सैनिट्री उनसे किस प्रकार निपटती है? आप इन बाधाओं को कैसे पार करती हैं?
सामाजिक मानदंडों और दृष्टिकोणों में ये चुनौतियाँ बहुत गहराई से समाई हुई हैं लेकिन इन बाधाओं को सही तरीके से पार किया जा सकता है। हम जिन समुदायों में काम करते हैं उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक और सामाजिक परिस्थितियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हैं। हम इन परिस्थितियों को समझने के लिए व्यापक शोध करते हैं और उसी के अनुरूप अपना तरीका निर्धारित करते हैं।
समुदाय की हर महिला तक पहुँचने के लिए हम सामुदायिक नेताओं और अन्य गैर सरकारी संगठनों के साथ मिलकर यह कार्य करते हैं ताकि हम इन गलत धारणाओं और

प्रतिबंधों पर सीधा ध्यान दे सकें और मासिक-धर्म के बारे में खुलकर और ढंग से बातचीत हो सके।
प्रश्न - ईशु आपका काम वास्तव में प्रेरणादायक है। क्या आप बताएँगी कि सैनिट्री के भविष्य के बारे में आपका क्या सपना है? आने वाले वर्षों के लिए आपकी क्या आशाएँ हैं?
हमारा उद्देश्य स्थायी, सहयोगात्मक और नैतिक तरीके से मासिक-धर्म संबंधी कलंक को हटाना और मासिक-धर्म संबंधी उत्पादों, शिक्षा, स्वच्छता आदि के अभाव को (period poverty) दूर करना है। हमारा लक्ष्य है अपनी पहुँच और प्रभाव बढ़ाते जाना, अधिक से अधिक लोगों को मासिक-धर्म स्वास्थ्य के बारे में शिक्षित करना, प्रतिबंधों को खंडित करना और मासिक-धर्म संबंधी अधिक वहनीय उत्पादों को उपलब्ध कराना। हम अपने प्रभाव को तेज़ी से बढ़ाने के लिए अन्य संगठनों के साथ साझेदारी के बारे में भी सोच रहे हैं।
हमारा उद्देश्य मासिक-धर्म को एक ऐसा अनुभव बनाना है जो लोगों को सशक्त करे और पृथ्वी के लिए भी हानिकारक न हो। हमारा मानना है कि जब सुरक्षित और स्वच्छ मासिक-धर्म उत्पादों की उपलब्धता की बात आती है तब आर्थिक और भौगोलिक रूप से लोगों में बहुत अंतर है जबकि यह एक बुनियादी मानव अधिकार है जो सभी मासिक-धर्म वाली महिलाओं को समान रूप से प्रदान किया जाना चाहिए। आने वाले समय में हम एक ऐसा संसार देखने की उम्मीद करते हैं जहाँ मासिक-धर्म को कलंक नहीं बल्कि जीवन का एक सामान्य, स्वस्थ हिस्सा माना जाएगा; एक ऐसा संसार जहाँ हर किसी को सुरक्षित, आरामदायक और वहनीय ‘मासिक-धर्म उत्पाद’उपलब्ध होंगे; एक ऐसा संसार जहाँ ‘मासिक-धर्म स्वास्थ्य’ को समग्र स्वास्थ्य और कल्याण के एक प्राकृतिक पहलू के रूप में मान्यता दी जाएगी।
प्रश्न - सामाजिक परिवर्तन लाने के लिए सहकार्यता बहुत महत्वपूर्ण है। क्या आप सैनिट्री के साथ की गई साझेदारियों और सहकार्यताओं के बारे में विस्तार से बता सकती हैं और किस तरह ये आपके काम को आगे ले जा सकती हैं?
सहकार्यता हमारे कार्य का आधार है। अकेले काम करने की अपेक्षा साथ मिलकर काम करने से हम कई गुना बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं। हम विभिन्न प्रकार के गैर सरकारी संगठनों, सरकारों और लोगों के साथ मिलकर काम करते हैं।
गैर सरकारी संगठन हमें उन समुदायों, जिनमें हम काम करते हैं, के ज़मीनी स्तर तक पहुँचने में और उनकी विशिष्ट ज़रूरतों व चुनौतियों को समझने में मदद करते हैं। सरकारें सहायक नीतियों और मीडिया की पहुँच के माध्यम से हमारे प्रभाव को बढ़ाने में हमारी मदद करती हैं। स्थानीय लोग मासिक-धर्म के बारे में समझकर और अपने समुदाय में उसे सामान्य बताकर हमारी मदद करते हैं।
प्रभावशाली लोग और मीडिया जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके मंचों का लाभ उठाकर हम अधिक लोगों तक पहुँच पाते हैं और मासिक-धर्म के बारे में खुली बातचीत को बढ़ावा दे पाते हैं।
प्रश्न - हमारे पाठक आपके प्रयासों में सहयोग करने और आपके उद्देश्य को पूरा करने में योगदान देने के लिए सैनिट्री के साथ किस प्रकार जुड़ सकते हैं?
इसके अनेक तरीके हैं। किसी भी सामाजिक कार्य को करने के लिए तीन महत्वपूर्ण चीज़ें होती हैं - समय, धन और ऊर्जा।
आप सोशल मीडिया पर हमारी विषय-सामग्री को साझा करने, मासिक-धर्म संबंधी स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाने और प्रतिबंधों का खंडन करने में अपना समय दे सकते हैं। हमारे कार्यों में अपने कौशल और ऊर्जा का योगदान देकर आप हमारी परियोजनाओं के लिए स्वेच्छा से काम कर सकते हैं। आप हमारे कार्य में सहयोग करने के लिए आर्थिक मदद भी दे सकते हैं जिससे हम ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँच पाएँ और अधिक प्रभाव डाल पाएँ।
हम उन सभी लोगों का, जिनमें हमारी तरह मासिक-धर्म संबंधी स्वास्थ्य और वहनीयता के प्रति गहन रुचि है, हमसे जुड़ने के लिए स्वागत करते हैं। साथ मिलकर हम मासिक-धर्म को सभी के लिए एक सहज और शक्तिदायक अनुभव बना सकते हैं।
प्रश्न - अपने ज्ञान और अनुभव को हमें बताने के लिए आपका धन्यवाद, ईशु। आपके भावी प्रयासों के लिए आपको बहुत बहुत शुभकामनाएँ।
ईशु - धन्यवाद करिश्मा। आपसे बात करके मुझे बहुत खुशी हुई। मुझे उम्मीद है कि हमारी बातचीत अधिक से अधिक लोगों को हमारे अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित करेगी।




कलाकृति - मेघा चावड़ा

ईशु शिवा
ईशु एक युवा सामाजिक उद्यमी और एक प्रमााणित योग प्रशिक्षक भी हैं। वे रााजस्थान की रहने वाली हैं। भ्रमण के प्रति अपने जोशभरे जुनून की वजह से उन्होंंने यूरोप, अमेरिका और विभिन्न भारतीय राज्योंं की यात्रा की है। उनकी प्रमुख आकांंक्षा है, नैत... और पढ़ें
