सारा बब्बर खुशी प्राप्त करने के बारे में एक सूफ़ी कहानी बता रही हैं और साथ ही दो मज़ेदार गतिविधियाँ भी सुझा रही हैं जो आपको अपनी खुशी पाने में मदद करेंगी।

खुशी ढूँढें

खुश हुए बिना मानसिक रूप से स्वस्थ होना नामुमकिन है। खुशी को बाहर नहीं खोजा जा सकता। यह केवल अपने भीतर से ही प्राप्त हो सकती है।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर अपनी खुशी पाने के बारे में एक अद्भुत कहानी प्रस्तुत है, जिससे आपको आंतरिक शांति प्राप्त होती है।

सूफ़ी कथा

एक समय की बात है, एक अमीर आदमी था जो खुशी, संतुष्टि और आनंद ढूँढने की कोशिश कर रहा था। वह उस व्यक्ति को कोई भी रकम देने को तैयार था जो उसे खुशी पाने का तरीका बता सके। इसके लिए वह कई गुरुओं के पास गया लेकिन कोई भी उसे संतुष्ट नहीं कर सका। वह खुश नहीं था। एक दिन हीरे-जवाहरातों से भरा थैला लेकर वह एक सूफ़ी संत के पास पहुँचा। थैला उनके सामने रखकर उसने उन्हें खुश रहने का तरीका सिखाने के लिए कहा। सूफ़ी गुरु शायद ही कभी सवालों के जवाब देते हैं। वे कुछ ऐसी परिस्थितियाँ पैदा कर देते हैं जिनसे व्यक्ति को बहुत कुछ सीखने को मिलता है।

सूफ़ी गुरु ने हीरे-जवाहरातों का थैला उठाया और वहाँ से भाग गया। अमीर आदमी उनके इस कृत्य से स्तब्ध था। उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि वह गुरु ऐसा कर सकता था। उसने एक महान सूफ़ी गुरु को अपनी अधिकांश जमा पूँजी के साथ भागते हुए देखा था। जब उसे होश आया तो वह दौड़ने और चिल्लाने लगा, “लुट गया।” उसने उस गुरु को बहुत ढूँढा लेकिन वह सूफ़ी संत गाँव की हर गली से वाकिफ़ था और आसानी से कहीं भी भाग सकता था।

 

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गाँव के लोग वहाँ इकट्ठा हो गए और उसे सांत्वना देने लगे। उन्होंने उसे शांत होने के लिए कहा। लेकिन वह अमीर आदमी सोच रहा था कि ऐसी स्थिति में वह शांत कैसे रह सकता है जब उसकी सारी संपत्ति उस थैले में थी जिसे संत लेकर भाग गया था। वह पूरी तरह बर्बाद हो गया था। वह सोचने लगा कि अब अपनी जीविका के लिए उसे भीख माँगनी पड़ेगी। वह कितना मूर्ख था जो उसने हीरे-जवाहरातों से भरे अपने थैले को इतनी लापरवाही से उस सूफ़ी संत के पास छोड़ दिया था।

वह अमीर आदमी और पूरा गाँव उस गुरु की खोज में लग गए। कुछ घंटों के बाद उन्होंने उस गुरु को उसी जगह बैठे देखा जहाँ अमीर आदमी पहली बार उसे मिला था। वह आराम से बैठा था और गहनों का थैला वहीं पड़ा था जहाँ उस आदमी ने उसे रखा था। अमीर आदमी जीवन भर की अपनी जमा पूँजी को देखकर खुशी से भर उठा और उस थैले पर लपका। उसने थैले को सीने से लगाया और राहत की साँस ली।

सूफ़ी संत ने पूछा, “क्या आप खुश हैं?”

आदमी ने जवाब दिया, “मैं पहले कभी इतना खुश नहीं हुआ।”

 

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सारा बब्बर

सारा एक कहानीकार, मोंटेसरी सलाहकार और बच्चों की एक पुस्तक की लेखिका हैं। वे एक प्रकृतिवादी भी हैं और बाल्यावस्था में पारिस्थितिकी चेतना के विषय में डॉक्टरेट कर रही हैं। वे आठ वर्षों... और पढ़ें

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