एमोरी विश्वविद्यालय की प्रोफ़ेसर लौरा ओटिस ने कशिश कलवानी के साथ “रेप्रेज़ेंटेशन ऑफ़ केयर इन लिटरेचर” पाठ्यक्रम के लिए चुनी गई पुस्तकों की सूची साझा की और बताया कि ये पुस्तकें इतनी महत्वपूर्ण क्यों हैं।

प्र. - प्रोफ़ेसर ओटिस! आपका स्वागत है। “देखभाल को साहित्य में कैसे दर्शाया गया है”- इस विषय पर आपके पाठ्यक्रम में हमने क्लारा एंड द सन, फ़्रैंकस्टीन, द डेथ ऑफ़ इवान इलीच, बिलवेड इत्यादि पुस्तकों पर चर्चा की। प्रत्येक कहानी नैतिकता और देखभाल के बारे में एक अनूठा दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। मैं इन पुस्तकों के मूल विषय के बारे में आपके विचार जानना चाहूँगी कि आखिर आपने इन्हें ही क्यों चुना।

प्रोफ़ेसर पॉल वोल्पे और मैंने कई पुस्तकों पर विचार किया। ऐसे कई उम्मीदवार (लेखक) थे जो इसमें सफल नहीं हो पाए। हमने जिन पुस्तकों को चुना उनमें अलग-अलग तरह से देखभाल को बहुत अच्छी तरह से दर्शाया गया था। उदाहरण के लिए -

मेरी शैली द्वारा लिखित ‘फ़्रैंकस्टीन’

हम सुनिश्चित करना चाहते थे कि हम मानव के पूरे जीवनकाल में देखभाल करने को ध्यान में रखें। एक आयाम है - माता-पिता बच्चों की देखभाल करते हैं या नहीं (जैसा कि ‘फ़्रैंकस्टीन’ में होता है), अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा करने और अपने बच्चों की देखभाल करने में कहीं वे विफल तो नहीं हो रहे हैं? ‘फ़्रैंकस्टीन’ में इन सवालों को बहुत प्रभावशाली तरीके से उठाया गया है। इसमें आप ऐसे व्यक्ति के सभी तर्कों को पढ़ते हैं जो अपनी ज़िम्मेदारियों से भाग रहा है। आप सोचने लगते हैं, “आखिर वे ऐसा कैसे सोच सकते हैं?”

लॉरेन ग्रॉफ़ द्वारा लिखित ‘फ़्लोरिडा’

मैं केवल व्यक्तिगत तौर पर एक-दूसरे की या किसी परिवार के भीतर लोगों की देखभाल करने के बारे में ही नहीं बल्कि सामाजिक स्तर पर लोगों की देखभाल करने के बारे में सोचना चाहती थी। मैं चाहती थी कि हम लॉरेन ग्रॉफ़ की कहानियाँ पढ़ें, खास तौर पर ‘फ़्लोरिडा’ में मौजूद आवासहीनता के बारे में पढ़ें। उसमें एक कहानी एक स्नातक छात्रा की है जो बेघर हो जाती है। कोई भी व्यक्ति जीवन में कुछ चीज़ों के गलत हो जाने पर बेघर हो सकता है। इस कहानी ने इस मुद्दे को उठाया कि जब हम अपने समुदाय में किसी ऐसे व्यक्ति से मिलते हैं जिसे देखभाल की ज़रूरत होती है तब हमारी प्रतिक्रिया क्या होती है? हम उसके लिए क्या करते हैं? क्या हमें कुछ व्यक्तिगत रूप से करना चाहिए या सामाजिक स्तर पर कुछ किए जाने की ज़रूरत है?

लियो टॉल्स्टॉय द्वारा लिखित ‘द डेथ ऑफ़ इवान इलीच’

हम यह समझना चाहते थे कि जीवन का अंत कैसे होता है। प्रोफ़ेसर वोल्पे ने ही ‘द डेथ ऑफ़ इवान इलीच’ पुस्तक को चुना। यह ऐसे व्यक्ति के जीवन में आए दुखद परिवर्तन पर केंद्रित है जिसे देखभाल की ज़रूरत है। उसका एक नौकर है जो मुख्यतः उसकी देखभाल करता है; उसका परिवार वास्तव में उसकी देखभाल नहीं करता।

मेरी रीना चित्तूरन द्वारा लिखित ‘इट इज़ व्हाट इंडियन गर्ल्स डू’

हम भिन्न-भिन्न संस्कृतियों के बारे में जानना चाहते थे ताकि हम दिखा सकें कि लोगों की देखभाल करने के मामले में अपेक्षाएँ कितनी अलग हैं। ‘इट इज़ व्हाट इंडियन गर्ल्स डू’ में एक प्रोफ़ेसर अपनी माँ की देखभाल कर रही है। वह ठीक से खाना भी नहीं खा पाती है; उसके पास सोने का भी समय नहीं है। मेरे खयाल से उसकी माँ ही है जो कहती है, “भारतीय लड़कियाँ ऐसा ही करती हैं (इट इज़ व्हाट इंडियन गर्ल्स डू)।” यही तर्क दिया गया था। ऐसी संस्कृतियाँ हैं जहाँ यदि आप फ़्रैंकस्टीन की तरह व्यवहार करते हैं या अपने माता-पिता की देखभाल करने से इनकार करते हैं तो आप समाज से बहिष्कृत कर दिए जाते हैं। कोई भी आपका सम्मान नहीं करता। फिर ऐसी भी संस्कृतियाँ हैं जहाँ माता-पिता को नर्सिंग होम में रखना पूरी तरह से स्वीकार्य है।

ये अलग-अलग आयाम हैं - जीवन की शुरुआत, जीवन का अंत, अलग-अलग संस्कृतियाँ और देखभाल के अलग-अलग सामाजिक स्तर।


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लौरा ओटिस

डॉ. ओटिस एमोरी यूनिवर्सिटी में अंग्रेज़ी की प्रोफ़ेसर हैं। उनके शोध को मैकआर्थर, गुगेनहेम, फुलब्राइट और हम्बोल्ट फ़ेलोशिप द्वारा समर्थित किया गया है। वे अकाल्पनिक और काल्पनिक कहानिय... और पढ़ें

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