उत्पादकता और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उपाय


डॉ. मनीष कुलकर्णी बहुत व्यस्त रहते हैं। इसलिए उन्होंने समय प्रबंधन के लिए एक तरीका निकाला है जिससे वे महत्वपूर्ण चीज़ों पर केंद्रित रह पाते हैं और जो महत्वपूर्ण नहीं है उसे अनदेखा कर पाते हैं।

 

मय अनंत है और कई चमत्कार कर सकता है। चौबीस घंटे का समय हमेशा लचीला होता है। हम कम समय में भी बहुत कुछ कर सकते हैं और अधिकतम समय मिलने पर भी वास्तव में कभी-कभी कुछ भी नहीं कर पाते हैं।

समय प्रबंधन समय को नियोजित और सचेत रूप से नियंत्रित करने की प्रक्रिया है - विशेष रूप से प्रभावशीलता, दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए हम विशिष्ट गतिविधियों पर कितना समय लगाते हैं। जब हम अच्छे समय प्रबंधन की बात करते हैं तब गतिविधियों के बजाय परिणामों पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है। व्यस्त होना प्रभावी या उत्पादक होने के समान नहीं है। अच्छे समय प्रबंधन से आप कड़ी मेहनत नहीं करते बल्कि बुद्धिमत्ता से काम करते हैं ताकि आप कम समय में अधिक काम कर सकें।

समय का प्रबंधन करना क्यों मुश्किल है?

अनुचित समय प्रबंधन के मुख्य कारण हैं -

  • कार्यों को सही प्राथमिकता न देना
  • उपयुक्त व्यवस्था न करना
  • काम को टालना
  • ध्यान भटकना

 

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उचित समय प्रबंधन के लाभ

जब हम अपना समय प्रबंधित करने लगते हैं और उससे लाभ उठाते हैं तो हम अपने दिन पर अधिक नियंत्रण महसूस करते हैं। हम अनुत्पादक गतिविधियों पर खर्च किए जाने वाले समय के बारे में अधिक जागरूक हो जाते हैं और समझ पाते हैं कि हमें उत्पादक गतिविधियों पर अधिक समय बिताना चाहिए। इसलिए हम स्वाभाविक रूप से अपने काम में और अपनी दैनिक गतिविधियों में अधिक उत्पादक बन जाते हैं। हम अपने काम पर अधिक समय तक ध्यान दे पाते हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम अर्थपूर्ण गतिविधियों के लिए समय निकाल पाते हैं।

जब हम अपना समय प्रबंधित करने लगते हैं और उससे लाभ उठाते हैं तो हम अपने दिन पर अधिक नियंत्रण महसूस करते हैं। हम अनुत्पादक गतिविधियों पर खर्च किए जाने वाले समय के बारे में अधिक जागरूक हो जाते हैं और समझ पाते हैं कि हमें उत्पादक गतिविधियों पर अधिक समय बिताना चाहिए।

समय प्रबंधन के लिए पाँच सहायक संकेत -

  1. काम पर जल्दी पहुँचकर अपने दिन की जल्दी शुरुआत करें।
  2. रात को ही अपने अगले दिन की योजना बनाएँ।
  3. कार्यों को प्राथमिकता के अनुसार क्रमबद्ध करें।
  4. दिन की शुरुआत से लेकर अंत तक अपना खयाल रखें।
  5. दैनिक गतिविधियों के बीच में छोटे-छोटे अवकाश लें जो आपके समय को क्रियाशील बनाते हैं।

आइज़नहावर मैट्रिक्स का उपयोग करना

ड्वाइट डेविड आइज़नहावर एक भूतपूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति थे जिन्होंने दैनिक गतिविधियों को महत्वपूर्ण और कम महत्वपूर्ण, बहुत ज़रूरी और गैर-ज़रूरी के अनुसार विभाजित करने के लिए एक मैट्रिक्स विकसित किया था। इन विभाजनों के आधार पर, एक दैनिक विवरण को मुख्य रूप से चार भागों में विभाजित किया जा सकता है -

  1. महत्वपूर्ण और बहुत ज़रूरी कार्य जिसे तुरंत करने की आवश्यकता है,
  2. गैर-ज़रूरी लेकिन महत्वपूर्ण कार्य जिसे बाद में किसी समय के लिए निर्धारित किया जा सकता है,
  3. बहुत ज़रूरी लेकिन कम महत्वपूर्ण कार्य जिसे किसी और को सौंपा जा सकता है और
  4. गैर-ज़रूरी और कम महत्वपूर्ण कार्य जिसे सूची से हटाया जा सकता है।

 

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लेकिन हम अपनी दिनचर्या में अक्सर गैर-ज़रूरी व कम महत्वपूर्ण कार्यों को करने में अधिक समय व्यतीत करते हैं और जब हम बहुत ज़रूरी और महत्वपूर्ण कार्यों पर ध्यान देने की सोचते हैं तब दिन लगभग समाप्त हो चुका होता है और हम थक चुके होते हैं। इसलिए आइज़नहावर मैट्रिक्स एक बेहतरीन साधन है।

खुद को ऊर्जावान बनाने के तरीके

लियो टॉल्स्टॉय ने एक बार कहा था, “जीवन के दो सबसे शक्तिशाली योद्धा धैर्य और समय हैं।” हम अपने दिन की शुरुआत में उत्साह कैसे भर सकते हैं? एक तरीका है सरल कृतज्ञता सूची बनाना। यह सूची सोने से पहले भी बनाई जा सकती है। दूसरा तरीका है व्यायाम, जिससे एंडोर्फ़िन स्रावित होता है, संज्ञानात्मक कार्य-प्रदर्शन बेहतर होता है और दिन की शुरुआत उपलब्धि की भावना के साथ होती है। तीसरा तरीका है सकारात्मक कथनों या संकल्पों को दोहराना, जो आप में स्वयं के प्रति और आपके द्वारा किए जाने वाले काम के प्रति दृढ़ता लाने में मदद करेंगे।

वे व्यक्तिगत संबंधों को बेहतर बनाने, निर्णय लेने की क्षमताओं को बढ़ाने और दिन की भागदौड़ में अवसरों को न छोड़ने में भी मदद करते हैं। आप और भी बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं।

अपनी सीमितताओं को जानते हुए, एक दिन के लिए लक्ष्यों की एक प्राप्त करने योग्य और यथार्थवादी सूची बनाएँ। दूसरों की प्रशंसा करें और अपने स्वयं के कार्यों की भी सराहना करें। यह आपको एक अच्छा जीवन जीने में मदद करता है।

इन सभी को कारगर बनाने के लिए अपनी मानसिकता को समायोजित करें। अपने मन को नई चीज़ों को आज़माने, बदलावों के अनुकूल होने और नई चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रशिक्षित करें। विकास के लिए समय निकालें। और यहीं पर हार्टफुलनेस ध्यान काम आता है। जैसा कि दाजी ने कहा है, “हृदय व मन के बीच तालमेल बैठाने का पूरा अभ्यास हृदय पर ध्यान लगाने से होता है।”

जब हम अपने हृदय को परिष्कृत करने के लिए समय निकालते हैं तब हम बहुत समय बचा सकते हैं क्योंकि हृदय मन का खयाल रखता है।


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मनीष कुलकर्णी

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