बस, कुछ सोच और एहसास

डॉ. इचक अडीज़ेस अपने चार मार्गदर्शी सिद्धांतों को बता रहे हैं और मुख्य रूप से प्रेम के महत्व व जीवन में प्रेम को विकसित करने के तरीके के बारे में चर्चा कर रहे हैं।

 

पनी आत्मकथा, ‘द अकॉर्डियन प्लेयर’ में मैं चार मार्गदर्शी सिद्धांतों के साथ समापन करता हूँ जिनमें वह ज्ञान है जिसे मैंने जीवन में सीखा है और साझा करना चाहता हूँ-

बिना ठेस पहुँचाए बोलो,
बिना बचाव किए सुनो,
बिना दिखावे के जीओ और
बिना निर्भर हुए प्यार करो।

ये सिद्धांत एक व्यक्तिगत संहिता बन गए हैं जिसके द्वारा मैं अपने दैनिक कार्यों का आंकलन करता हूँ।

बिना दिखावा किए जीना मेरे लिए सबसे आसान रहा है। और बिना किसी पर निर्भर हुए प्रेम करना सबसे चुनौतीपूर्ण था और आज भी है।

मैं जो कुछ भी करता हूँ, वह अधिकांशतः प्रेम पाने के लिए ही होता है। मैं अपने काम के ज़रिए प्रेम पाने की कोशिश करता हूँ जो मुझे अच्छा लगता है और बदले में मैं प्रेम किए जाने की उम्मीद करता हूँ। इसका मतलब है प्रेम का अनुभव करने के लिए दूसरों पर निर्भर रहना। ऐसी निर्भरता बहुत पीड़ादायक हो सकती है क्योंकि प्रेम हमेशा नहीं मिलता। इसकी वजह से कई रातें मैं नींद से वंचित रहा, जिसके दौरान मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि मुझे खुद को ज़्यादा प्रेम करने की ज़रूरत है। मैंने निष्कर्ष निकाला कि ऐसा करने से मैं प्रेम महसूस करने के लिए दूसरों पर कम निर्भर रहूँगा।

यह सच है कि आत्म-प्रेम पर केंद्रित रहने से व्यवहार में स्वयं के लिए अत्यधिक प्रेमासक्ति हो सकती है - एक नकारात्मक दुष्प्रभाव। तो, उचित समाधान क्या है? बिना किसी निर्भरता के प्रेम का अनुभव कैसे करें?

गौर करें कि जब प्रेम और पूर्ण एकीकरण होता है तब सब कुछ बढ़ता है और फलता-फूलता हैतालमेल और सहजीवन होता है।

तालमेल तब होता है जब विविध प्रकार के लोग साथ मिलकर काम करते हैं और कुछ नया बनाते हैं। इसके लिए, विविध लोग सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं और एक-दूसरे से सीखते हैं। यह तभी होगा जब परस्पर सम्मान हो, एक-दूसरे के अलग-अलग होने, सोचने और कार्य करने के अधिकार की मान्यता हो।

सहजीवन के लिए आपसी विश्वास का होना ज़रूरी है कि सभी का एक साझा हित है। जब ऐसा होता है तब इसमें शामिल लोग एक-दूसरे के साथ सहयोग करते हैं और जो कुछ भी निर्मित होता है वह लंबे समय तक बना रहता है।

पारस्परिक विश्वास और सम्मान प्रेम के आधार हैं। इनके बिना सहजीवन और तालमेल खत्म हो जाते हैं। इनके बिना प्रेम गायब हो जाता है। इस प्रकार, प्रेम महसूस करने की पहली शर्त दूसरों के साथ विश्वास और सम्मान के साथ व्यवहार करना है। हमारे रिश्ते जितने अधिक आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित होंगे, उतनी ही अधिक संभावना है कि लोगों में परस्पर प्रेम पैदा होगा और पनपेगा।

निर्भरता के बिना प्रेम’ का अर्थ मेरे लिए यही है कि प्रेम इस बात पर निर्भर करता है कि मैं कैसे व्यवहार करता हूँ, न कि दूसरे मेरे साथ कैसा व्यवहार करते हैं। दूसरों के अलग तरीके से सोचने के अधिकार का सम्मान करें और हमेशा सबके हित में कार्य करें।

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