मॉरीन हिटीप्यु ‘सिंगल मॉम्स इंडोनेशिया’ की स्थापना के बारे में और यह सीखने के बारे में बताती हैं कि अनुराग एक भावना नहीं बल्कि ज़रूरत पड़ने पर दूसरों की रोज़ाना मदद करना है।

मैं समझ गया

मैंने इस राह की कभी योजना नहीं बनाई थी। मेरा कोई विशाल स्वप्न भी नहीं था, बस एक दर्दनाक पल था जब मैंने इंडोनेशिया में एकल माताओं के लिए एक सहायता प्रदान करने वाले समूह की तलाश की और उस समय मुझे कुछ नहीं मिला। वह कमी मेरे साथ बनी रही। जब मैं अंततः कुछ अन्य एकल माताओं से मिली तब मुझे एहसास हुआ कि शायद मैं वह समूह बना सकती हूँ जिसकी मुझे कभी ज़रूरत थी।

मैंने एक फेसबुक ग्रुप (अब मेटा के नाम से है) शुरू किया। शुरुआत में हम सिर्फ़ दो दोस्त थे। हमारे पास कोई कार्य-सूची या कार्य-योजना नहीं थी, बस कुछ कर गुज़रने की चाह थी। साथ ही एक तरह का अनुराग था जिसके लिए मेरे पास कोई नाम नहीं था।

एक सीधे-सादे कार्य से इसकी शुरुआत हुई। आज यह 11,600 से अधिक महिलाओं का समुदाय बन गया है, जिसे ‘सिंगल मॉम्स इंडोनेशिया’ के नाम से जाना जाता है। लेकिन उस समय यह सिर्फ़ जुड़ने की एक तीव्र इच्छा थी, जिसने सेवा के रूप में एक भाव को जन्म दिया।

इस सफ़र में मुझे बहुत काम करना पड़ा - मौजूद रहना, सुनना और निरंतर बढ़ते रहना। हम जो बना रहे थे, उसके लिए हमारे पास कोई ढाँचा नहीं था। मैंने खुद अपने प्रयास से सीखा। कई बार गलतियाँ कीं और उसके लिए खुद पर सवाल उठाए। लेकिन हर बार जब मैं खुद को छोटा या अनिश्चित महसूस करती तब ज़िंदगी मुझे आगे बढ़ने के लिए एक हल्का सा संकेत देती, एक संदेश कि वह काम मायने रखता है और ज़रूरी है। मैं इसे अपना कर्म समझने लगी ‒ कर्मफल के बारे में सोचे बिना जो करना ज़रूरी है, उसे करना चाहिए।

उस दौरान मैं कुछ ऐसे अनुभवों से गुज़री जिन्होंने मुझे और भी निखारा। वर्ष 2020 में मैं मेटा द्वारा प्रस्तुत एक वैश्विक सामुदायिक नेतृत्व कार्यक्रम में शामिल हुई। मैं खुद को एक ‘नेता’ के रूप में नहीं देखती थी लेकिन प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और समर्थन ने मुझे यह एहसास दिलाया कि समुदाय निर्माण सेवा करने का एक अवसर था।

बेशक, बिना सोचे-समझे किया गया कर्म हमें भटका सकता है। इसलिए चिंतन ज़रूरी रहा है - एक निरंतर शिक्षक रहा है। मैंने दुख के समय ब्लॉग लिखे हैं, दर्द को अनुच्छेदों में पिरोया है और ऐसा करने के लिए तैयार होने से पहले अपनी कहानी के कुछ अंश साझा किए हैं। लिखने की उस प्रक्रिया से मैं खुद को और दूसरों को ज़्यादा सार्थक रूप से समझने लगी। मैं अपने ज्ञानवर्धन के लिए काम नहीं कर रही थी, लेकिन समय के साथ, “अब मैं कौन हूँ?” और “मैं क्या दे सकती हूँ?” जैसे प्रश्नों पर विचार करने के बाद मुझे चकित करने वाले उत्तर मिले हैं।

मेरे लिए अनुराग प्रतिबद्धता और सेवा के माध्यम से व्यक्त किया गया प्रेम है - एक ऐसा विकल्प जिसे हम रोज़ाना चुनते हैं। मैं मानने लगी हूँ कि अनुराग कर्म है। इसका अर्थ है मुश्किल होने पर भी मौजूद रहना। इसका अर्थ है आधी रात में भी संदेश का उत्तर देना। इसका अर्थ है दूसरों के लिए अनुकूल वातावरण बनाना, भले ही आप स्वयं अंदर से पूरी तरह से निराश हों।

मेरे समुदाय की महिलाएँ मेरी सबसे बड़ी शिक्षिका के रूप में उभरी हैं। मैंने उन्हें जीवन में सब कुछ बर्बाद हो जाने पर भी नए जोश के साथ उभरते हुए, कठिन समय में भी आशा व दृढ़ता से आगे बढ़ते हुए और अपने बच्चों व स्वयं के लिए बार-बार डटकर खड़े होते हुए देखा है। इन महिलाओं ने मुझे सिखाया है कि उपचार, क्षमा और फिर से शुरुआत करना सबसे बड़ी ताकत हैं। मातृत्व और आत्म-सम्मान के माध्यम से व्यक्त किया गया वह पवित्र प्रेम पूरी तरह से दर्शाता है कि अनुराग कर्म है।

मेरे जीवन में एक ऐसा विशेष पल आया जब मुझे यह एहसास हुआ कि मेरा उद्देश्य सेवा करना है। हाल ही में एक तलाकशुदा माँ ने हमारे ग्रुप में कुछ संदेश भेजा। वह आत्महत्या की कगार पर थी। समुदाय ने उसे पूरी सहायता व देखभाल दी और ऑनलाइन मंच से उसके संपर्क में रहा। और वह आज जीवित है। आज वह संपन्न है और अपनी स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी कर रही है। मेरे लिए यह कृपा है। इसीलिए मैं लगातार उनके लिए मौजूद रहती हूँ।

मैं मानती हूँ कि यह सफ़र सिर्फ़ मेरा नहीं है। मैं इसे कृपा या मार्गदर्शन कहती हूँ - नाम चाहे कोई भी हो - लेकिन इसका आशय, आपके सामने जो है उसके प्रति ईमानदार रहना है। किसी भी ऐसे व्यक्ति के लिए जो किसी नाज़ुक मोड़ पर खड़ा है - खोया हुआ, शोकग्रस्त या अनिश्चित - मैं इतना जानती हूँ कि आपको उसकी सहायता करने के लिए पूरी योजना बनाने की आवश्यकता नहीं है। बस, अगला छोटा कदम उठाएँ। वह छोटा सा कार्य ही आपका मार्गदर्शन करेगा और समय के साथ आप पाएँगे कि आपका सबसे गहरा दर्द भी किसी पवित्र चीज़ की नींव बन सकता है।

अनुराग ही कर्म है’ का भाव रखने से हर दिन की शुरुआत इस निर्णय के साथ होती है कि आप हर ज़रूरतमंद के लिए मौजूद रहेंगे और ग्रहणशील व दृढ़ बने रहेंगे।


मेरे लिए अनुराग प्रतिबद्धता और सेवा के माध्यम से व्यक्त किया गया प्रेम है - एक ऐसा विकल्प जिसे हम रोज़ाना चुनते हैं। मैं मानने लगी हूँ कि अनुराग कर्म है।


 

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