राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (National Doctors’ Day) हर साल जुलाई को मनाया जाता है। इस अवसर पर सारा बब्बर ने एक बौद्ध कथा सुनाई जो एक दूरदर्शी उपचारक की कहानी है। उनके समग्र दृष्टिकोण में न केवल रोगियों का स्वास्थ्य बल्कि प्रेम के माध्यम से समाज की भलाईविकास और समृद्धि भी समाहित थी।

 

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हुत समय पहले एक राजा था जो अत्यंत सक्रिय था। उसे घुड़सवारी करना, अपने राज्य के लोगों की स्थिति जानना और सैन्य अभ्यास करना बहुत पसंद था। एक दिन वह बहुत सुस्त महसूस कर रहा था लेकिन उसने इसे नज़रअंदाज़ कर दिया। समय के साथ उसकी सुस्ती बढ़ती गई और वह सोचने लगा कि आखिर समस्या क्या है। उसने वैद्य बुलाए, जिन्होंने उसे जड़ी-बूटियों से बनी औषधियाँ दीं। लेकिन उनसे कोई फ़ायदा नहीं हुआ।

राजा दुखी था क्योंकि वह अब अपनी पसंदीदा गतिविधियों में भाग नहीं ले पा रहा था। एलोपैथिक डॉक्टरों ने उसे एंटीबायोटिक्स दीं। आयुर्वेदिक वैद्यों ने उसके आंतरिक शरीर पर काम करने की कोशिश की और पुजारियों ने उसके स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रार्थना की। लेकिन उसकी दशा में कोई सुधार नहीं हुआ।

राजा ने अपने ठीक होने की आशा छोड़ दी थी। लेकिन फिर उसे दरबारियों से राज्य के एक दूरस्थ क्षेत्र में रहने वाले भिक्षु के बारे में पता चला जो एक महान उपचारक था। राजा ने सोचा कि वह पहले ही बहुत कुछ आज़मा चुका है, एक और उपाय को आज़माने में क्या नुकसान है।

उसने दरबारियों से भिक्षु को बुलाने के लिए कहा। एक संदेशवाहक के साथ उसे पत्र भेजा गया। लेकिन प्रत्युत्तर में भिक्षु ने भी एक पत्र भेज दिया। उसमें लिखा था कि यदि राजा उपचार चाहता है तो उसे मठ में आना होगा। दरबारी इस बात पर बहुत क्रोधित हुए कि भिक्षु की राजा को उपनगर बुलाने की हिम्मत कैसे हुई।

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लेकिन राजा इससे परेशान नहीं हुआ और वह भिक्षु से मिलने चल पड़ा। पालकी में राजा को मठ ले जाया गया जहाँ वह भिक्षु के साथ कुछ दिन रहा। भिक्षु ने उसका स्वागत किया और उसे साधारण आहार दिया। साधारण भोजन और जड़ी-बूटियों के नुस्खों से राजा ठीक होने लगा। भिक्षु ने राजा से कहा कि सरल जीवन और प्राकृतिक वातावरण में रहना ही सबसे अच्छी औषधि है। इस सरल ज्ञान से राजा चकित रह गया। वह अपनी जीवनशैली और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले उसके प्रभाव पर विचार करने लगा। राजा ने निर्णय लिया कि उसका स्वास्थ्य मंत्री इस ज्ञानी उपचारक से प्राकृतिक जीवनशैली के बारे में सीखने आए।

जब वह लौटने को तैयार हुआ तब भिक्षु ने उसे एक पत्र लिखकर दिया और कहा कि उसे केवल महल पहुँचने के बाद ही पढ़े। साथ ही, सलाह दी कि वह अपने घोड़े पर सवार होकर जाए क्योंकि वह तंदुरुस्त हो चुका था। घोड़े पर सवार राजा जब वहाँ से महल की ओर जा रहा था तो उसने देखा कि उसका घोड़ा बहुत धीरे और कठिनाई से चल रहा था। सड़क पर पड़े कंकड़ों के कारण उसे संतुलन बनाने में मुश्किल हो रही थी।

राजा अपने राज्य के उस क्षेत्र की स्थिति देखकर हैरान था। सड़कें खराब थीं और कचरे से भरी थीं। वह पहले कभी उस क्षेत्र में नहीं आया था। उसने महल पहुँचकर भिक्षु का पत्र पढ़ा। उसमें लिखा था कि राज्य के अधिकांश लोग केवल प्राकृतिक उपचार ही ले सकते थे जो भिक्षु उन्हें देता था क्योंकि उनका जीवन का स्तर अच्छा नहीं था। राजा होने के नाते यह उसका दायित्व था कि वह इस स्थिति को देखे और जाने। इसी कारण भिक्षु ने उसे घोड़े पर सवारी करने को कहा था।

 

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राजा सोचने लगा कि वर्षों से मंत्रियों तथा ठेकेदारों द्वारा कर और समृद्धि के नाम पर जो धन लिया गया था, वह कहाँ गया। उसने फिर खुद सुनिश्चित किया कि सड़कें ठीक हों, लोग विकास में शामिल हों और समृद्धि बढ़े। वह चकित था कि कैसे एक व्यक्ति द्वारा उसे एक नई दुनिया से परिचित करवाना उस पर इतना बड़ा प्रभाव डाल सकता था। वह समझ गया कि स्वास्थ्य केवल शरीर से नहीं बल्कि समग्र कल्याण और समृद्धि से जुड़ा है। उसने यह भी जाना कि एक अच्छा चिकित्सक केवल चिकित्सा का ज्ञाता नहीं होता बल्कि उसमें अत्यधिक करुणा भी होती है - ठीक उसी तरह, जैसे भिक्षु में थी।

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सारा बब्बर

सारा एक कहानीकार, मोंटेसरी सलाहकार और बच्चों की एक पुस्तक की लेखिका हैं। वे एक प्रकृतिवादी भी हैं और बाल्यावस्था में पारिस्थितिकी चेतना के विषय में डॉक्टरेट कर रही हैं। वे आठ वर्षों... और पढ़ें

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