श्रवण बांदा एक वास्तुकार हैं जिन्हें प्रकृति और निर्माण-कार्य में इसकी भूमिका के बारे में बहुत अच्छी जानकारी है। यहाँ वे डिज़ाइन व वातावरण तैयार करने में स्थानीय जैव विविधता और स्थानीय पौधों के महत्व के बारे में अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं और भवन के अंदर पौधे रखने के लाभ भी बता रहे हैं।
स्थानीय जैव विविधता को अपनाने का महत्व
इन दिनों वास्तुकला (architecture) और आंतरिक सज्जा (interior design) के क्षेत्र में बायोफ़िलिक यानी प्रकृति-प्रेरित डिज़ाइन अपनाने का चलन काफ़ी बढ़ गया है। प्रकृति से मनुष्य के स्वाभाविक जुड़ाव के कई स्वास्थ्य एवं कल्याणकारी लाभ होते हैं जैसे तनाव में कमी, उत्पादकता में वृद्धि और स्वास्थ्य में बेहतरी। बायोफ़िलिया (प्रकृति-प्रेम) में पौधों को शामिल करना महत्वपूर्ण होता है लेकिन सभी पौधे एक से नहीं होते। किसी भी जगह पर कोई भी पुराना पौधा लगा देने की तुलना में स्थानीय पौधे लगाने के लाभ अधिक होते हैं।
स्थानीय पौधे वे होते हैं जो एक विशेष परिस्थितिकी तंत्र या क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से उगते हैं। वे अपने विशेष वातावरण में फलने-फूलने के लिए वहाँ उगते हैं और वे स्थानीय तापमान, वर्षा और मिट्टी की गुणवत्ता आदि के अनुसार आसानी से ढल जाते हैं। अपने डिज़ाइन में इस तरह के पौधे शामिल करने से हम स्थानीय परिवेश और जैव विविधता से ज़्यादा मज़बूत जुड़ाव बनाते हैं।
स्थानीय पौधों को लगाने के प्रमुख लाभों में से एक यह है कि वे पहले से ही स्थानीय वातावरण के अनुकूल होते हैं इसलिए उनके लिए कम संसाधनों और रख-रखाव की आवश्यकता होती है। इन्हें लगाने से डिज़ाइन का वातावरण पर पड़ने वाला बुरा प्रभाव कम हो जाता है और ये किफ़ायती भी होते हैं।
दूसरा लाभ यह है कि स्थानीय प्रजाति के पेड़-पौधे स्थानीय वन्य जीवन को आवास और भोजन प्रदान करते हैं जिससे वहाँ का पारिस्थितिकी तंत्र अधिक संतुलित होता है और विविध प्रकार की प्रजातियों को सहारा देता है। शहरी क्षेत्रों में इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है क्योंकि शहरी विकास के कारण अनेक प्रजातियों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो चुके हैं।
इन पारिस्थितिकीय लाभों के अतिरिक्त इसके शैक्षिक और सांस्कृतिक महत्व भी हैं। जब हम अपने डिज़ाइन में स्थानीय प्रजातियों के पेड़-पौधे प्रमुखता से दर्शाते हैं तब वास्तव में हम उस क्षेत्र की विशिष्ट जैव विविधता की सराहना करते हैं। इस प्रकार हम स्थानीय संस्कृति व इतिहास से गहनतर जुड़ाव पैदा करते हैं। यह आगंतुकों और स्थानीय वासियों को स्थानीय वातावरण और उसके संरक्षण के महत्व के बारे में शिक्षित करने के अवसर प्रदान करता है।
अंततः स्थानीय पौधों को लगाने से ये प्रजातियाँ भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित भी रहती हैं। अपने डिज़ाइन में उनका महत्व दर्शाने से हम उन पौधों और जिस पारिस्थितिकी तंत्र को वे सहारा देते हैं, उसके प्रति अधिक जागरूकता और समझ पैदा कर सकते हैं। इससे संरक्षण के प्रयास बढ़ सकते हैं और भविष्य अधिक स्थायी बन सकता है।
स्वास्थ्य और कल्याण में स्थानीय पौधों की भूमिका
जैसे-जैसे लोगों में स्थानीय पारितंत्र और जैव विविधता के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है वैसे-वैसे स्थानीय पौधों की लोकप्रियता भी बढ़ रही है। लेकिन पारितंत्र संबंधी महत्व के अतिरिक्त ये पौधे मानवीय स्वास्थ्य और कल्याण के लिए भी कई लाभ प्रदान करते हैं।
बायोफ़िलिक डिज़ाइन में स्थानीय पौधों के प्रयोग से मन में उस स्थान व उसकी पहचान का भाव उत्पन्न हो जाता है। डिज़ाइनर ऐसे अद्भुत और विशुद्ध वातावरण की रचना कर सकते हैं जिसमें स्थानीय परंपरा और संस्कृति की झलक होती है। इससे लोगों में सामुदायिक और अपनेपन की भावना भी पैदा होती है और वातावरण के प्रति जुड़ाव भी बढ़ता है।
पौधों की प्रजातियों को चुनते समय उनकी सुंदरता और उपयोगिता का ध्यान रखना महत्वपूर्ण होता है। कुछ पौधे चार-दीवारी में लगाए जा सकते हैं जबकि कुछ अन्य को अधिक प्रकाश और आर्द्रता की आवश्यकता होती है। इसके अलावा डिज़ाइनर अलग-अलग बनावट, रंग और सुगंध के पौधे चुनकर एक अलग ही संवेदी अनुभव प्रदान करते हैं।
भवन के अंदर रखे जाने वाले पौधे
आज संसार में बढ़ते शहरीकरण के कारण हमें प्रकृति से जुड़ने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। इसका एक महत्वपूर्ण तरीका है घर के अंदर पौधों को रखना। वे न सिर्फ़ सौंदर्य बढ़ाते हैं बल्कि घर के अंदर के वातावरण को निम्नलिखित तरीकों से अधिक स्वास्थ्यकर और सामंजस्यपूर्ण बनाकर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करते हैं।

1. वायु की गुणवत्ता और शुद्धिकरण
भवन के अंदर रखे जाने वाले पौधे वातावरण से विषैले तत्वों को हटाते हैं और वायु की गुणवत्ता को सुधारते हैं। प्रकाश संश्लेषण द्वारा पौधे घर के आंतरिक वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाते हैं। इसके अलावा कुछ पौधों में नुकसानदेह वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (volatile organic compounds) जैसे फ़ॉर्मेल्डीहाईड और बेंज़ीन को हटाने की क्षमता भी होती है। इससे हमें अधिक ताज़ा और साफ़ हवा मिलती है और श्वसन संबंधी समस्याओं का खतरा कम होता है तथा संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार आता है।
2. तनाव में कमी और मानसिक स्वास्थ्य
पौधे हमारे मन और शरीर को शांत करते हैं। अध्ययनों से पता चला है कि उनकी उपस्थिति से मनुष्य में तनाव और रक्तचाप का स्तर कम हो जाता है और हम आराम महसूस करते हैं। प्रकृति के साथ यह दृश्य-संपर्क शांति देता है और दैनिक जीवन की भागा-दौड़ी से अति वांछित राहत देता है। अंदर रखे जाने वाले पौधे हमारी चिंता को कम करते हैं, मनोदशा में सुधार लाते हैं और संज्ञानात्मक कार्य क्षमता में वृद्धि करते हैं। भवन के अंदर उनके होने से एकाग्रता, रचनात्मकता और उत्पादकता में सुधार आता है।
(प्रकृति के साथ यह दृश्य-संपर्क शांति देता है और दैनिक जीवन की भागा-दौड़ी से अति वांछित राहत देता है। अंदर रखे जाने वाले पौधे हमारी चिंता को कम करते हैं, मनोदशा में सुधार लाते हैं और संज्ञानात्मक कार्य क्षमता में वृद्धि करते हैं। भवन के अंदर उनके होने से एकाग्रता, रचनात्मकता और उत्पादकता में सुधार आता है।)
3. सौंदर्य
बायोफ़िलिक स्थान एक प्रकार से प्राकृतिक वातावरण की नकल होते हैं जिसके कारण प्रकृति से सामंजस्य और जुड़ाव का भाव पैदा होता है। भवन के अंदर रखे जाने वाले पौधे वहाँ के वातावरण को सुंदर और रंग-बिरंगा बना देते हैं और रूखे वातावरण को आकर्षक और जीवंत बना देते हैं। प्रकृति को भीतर ले आने से हम एक मनमोहक वातावरण बना लेते हैं जो हमारी खुशियाँ बढ़ाता है।
4. शोर में कमी और सुनने की क्षमता में वृद्धि
भवन के अंदर रखे जाने वाले पौधों के कारण वहाँ शोर में कमी आती है और सुनने की क्षमता बढ़ जाती है। कुछ पौधों में ध्वनि को अवशोषित करके उसकी तीव्रता कम करने का गुण होता है। वे वातावरण के शोर को कम करके उसे अधिक शांतिपूर्ण बना देते हैं। ओपन-प्लान कार्यालयों में और भवन के अंदर की व्यस्त व्यवस्था में जहाँ शोर के कारण बहुत व्यवधान होता है ये पौधे बहुत उपयोगी होते हैं। पौधों को युक्तिपूर्वक रखने से स्थानों में शांति व केंद्रीयता बढ़ जाती है जिससे एकाग्रता और उत्पादकता बढ़ती है।
5. उत्पादकता में वृद्धि
कई अध्ययनों में यह रेखांकित हुआ है कि कार्यस्थल के अंदर पौधों को रखने से वहाँ की उत्पादकता, कर्मचारियों के स्वास्थ्य, कार्य संतुष्टि और मनोबल में वृद्धि होती है तथा तनाव में कमी होती है। इससे उनकी कार्य के प्रति लगन बढ़ती है और कार्य प्रदर्शन में सुधार होता है। अंदर रखे जाने वाले पौधे कृत्रिम प्रकाश में रहने के नकारात्मक प्रभाव को कम करके वातावरण को अधिक प्राकृतिक और संतुलित बनाते हैं।
6. आर्द्रता नियंत्रण
वाष्पोत्सर्जन (transpiration) द्वारा पौधे नमी छोड़ते हैं जिससे कमरों में आर्द्रता नियंत्रित रहती है। आर्द्रता का उचित स्तर होने से श्वास संबंधी स्वास्थ्य में सुधार होता है तथा त्वचा और श्लेष्मा झिल्ली (mucous membrane) की शुष्कता में कमी आती है व गले के सूखापन और गले की जकड़न में राहत मिलती है।
7. प्रकृति से जुड़ाव
अंदर रखे जाने वाले पौधों से शहरी वातावरण में भी प्राकृतिक संसार से जुड़ने का अवसर मिलता है। इस जुड़ाव का सकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभाव होता है जिससे सामंजस्यता, स्थिरता एवं संपूर्ण स्वास्थ्य व कल्याण में वृद्धि होती है। अपने चारों ओर हरियाली होने से हम अपने परिवेश से अधिक जुड़ाव, संतुलन और तालमेल महसूस कर सकते हैं।
8. ऑक्सीजन के स्तर में वृद्धि
अंदर रखे जाने वाले पौधे ऑक्सीजन देते हैं जिससे भीतरी स्थानों में ऑक्सीजन के स्तर में वृद्धि होती है। इसका हमारे समग्र स्वास्थ्य, बढ़ती सतर्कता, एकाग्रता और उत्पादकता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
यहाँ हम कुछ भवन के अंदर रखे जाने वाले पौधों के बारे में बता रहे हैं जो स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार लाते हैं। 1
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1 अपने घर के अंदर प्रकाश की व्यवस्था और रखरखाव आवश्यकताओं के आधार पर इनडोर पौधों का चयन करें।
(अंदर रखे जाने वाले पौधों से शहरी वातावरण में भी प्राकृतिक संसार से जुड़ने का अवसर मिलता है। इस जुड़ाव का सकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभाव होता है जिससे सामंजस्यता, स्थिरता एवं संपूर्ण स्वास्थ्य व कल्याण में वृद्धि होती है।)


नाग पौधा या स्नेक प्लांट (संसेवेरिया )
यह वायु शुद्धिकारक पौधा है जो वायु से विषैले तत्वों जैसे फ़ॉर्मेल्डीहाइड, बेंज़ीन आदि को खींच निकालता है। इसे कम रख-रखाव, सूर्यप्रकाश और पानी की आवश्यकता होती है। यह रात्रि में ऑक्सीजन देता है इसलिए शयनकक्ष के लिए उत्तम है क्योंकि यह नींद की गुणवत्ता में सुधार लाता है।

शांति लिली (स्पैथीफ़िलम )
यह सुंदर सफ़ेद पुष्पों वाला पौधा है जो सौंदर्य में वृद्धि करता है और घर के अंदर मौजूद सामान्य प्रदूषणों को हटाकर वायु को शुद्ध करता है। यह कम सूर्यप्रकाश और हलकी नमी वाली मिट्टी में पनपता है।

एरेका पाम (डिप्सिस ल्यूटेसेंस )
इसके पत्ते पंखदार होते हैं और गोलाई में फैलते हैं जिससे उस स्थान में थोड़ा उष्णकटिबंधीय पुट भी आ जाता है। एरेका पाम प्रभावशाली वायु शुद्धिकारक होते हैं। ये विषैले तत्वों को हटाते हैं और आर्द्रता बढ़ाते हैं। ये तेज़ व अप्रत्यक्ष प्रकाश में बढ़ते हैं।

मनी प्लांट (एपिप्रेमनम ऑरियम )
यह वायु शुद्धिकारक और सौभाग्य लाने वाला पौधा माना जाता है। इसकी पत्तियाँ हृदय के आकार की होती हैं और यह पानी या मिट्टी दोनों में बढ़ सकता है। इसकी देखभाल करना आसान है क्योंकि यह किसी भी तरह की रौशनी में पनप सकता है।

बोस्टन फ़र्न (नेफ़्रोलेपिस एक्साल्टाटा)
इसके पत्ते पंखदार, हरे-भरे और गुच्छे में होते हैं और ये घर के अंदर की वायु की गुणवत्ता को सुधारते हैं। ये आर्द्र परिस्थिति में बढ़ते हैं और इन्हें अप्रत्यक्ष प्रकाश की आवश्यकता होती है। ये वातावरण की आर्द्रता में वृद्धि करते हैं इसलिए शुष्क आंतरिक स्थानों के लिए उपयुक्त हैं।

एलो वेरा (एलो बार्बाडेन्सिस)
यह भवन के अंदर लगाया जाने वाला बहुउपयोगी पौधा है जिसके कई लाभ हैं। इसके जैल का उपयोग जलन और त्वचा रोगों में किया जा सकता है और इसके रस का उपयोग पाचन संबंधी स्वास्थ्य के लिए किया जा सकता है। यह रसभरा पौधा है जो तेज़ व अप्रत्यक्ष प्रकाश में और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में बढ़ता है।

स्पाइडर प्लांट या मूसली (क्लोरोफ़ाइटम कोमोसम)
इसकी लंबी व धनुषाकार पत्तियों और रख-रखाव में सरलता के कारण यह पौधा बहुत लोकप्रिय है। यह विषैले तत्वों जैसे फ़ॉर्मेल्डीहाइड, ज़ायलीन आदि को वायु से खींच निकालता है। इसे बढ़ने के लिए तेज़ व अप्रत्यक्ष प्रकाश चाहिए। यह भवन के अंदर के विभिन्न वातावरणों में शीघ्र ही ढल जाता है।

तुलसी (ओसीमम टेनुईफ़्लोरम)
भारतीय संस्कृति में तुलसी को बहुत पवित्र माना जाता है। इसमें औषधीय गुण होते हैं और माना जाता है कि यह परिवेश में सकारात्मक ऊर्जा संचारित करती है। इसे तेज़ प्रकाश और सतत पानी देने की आवश्यकता होती है।
भवन के अंदर रखे जाने वाले पौधे वातावरण को अधिक स्वस्थ, शांत, सुंदर और प्रसन्नता देने वाला बनाते हैं जो हमारे प्रकृति के साथ स्वाभाविक जुड़ाव के अनुकूल है। इससे घरों के अंदर रहने का सामंजस्यपूर्ण व संतोषजनक अनुभव प्राप्त होता है और मन, शरीर व आत्मा का पोषण होता है।

श्रवण बांदा
श्रवण की विशेषज्ञता आर्द्ररभूूमि का निर्मााण और अपशिष्ट जल चुनौतियोंं का समाधान करना है। वे आईजीबीसी द्वारा मान्यता प्राप्त एक ग्रीन बिल्डिंग प्रोफेशनल याानी हरित भवन व्यवसायी और 'सोसाइटी ऑफ वेटलैंंड साइंंटिस्ट्स', यूएसए के सदस्य हैं। उन... और पढ़ें
