एमिली मोगेनसन ने अपने पिता थॉमस मोगेनसन के साथ पत्र-व्यवहार फिर से शुरू कियाजैसा वे अपनी युवावस्था में करती थीं। वर्षों बादअब वे उनसे पूछती हैं कि जीवन भर ध्यानआध्यात्मिकता और दुनिया में रहने के बाद उनके लिए वास्तव में क्या मायने रखता है।

तिहास खुद को दोहरा रहा है और मुझे अपने जीवन का वह समय याद आ रहा है जब मैं एक छोटी लड़की थी और मणपक्कम आश्रम में जाया करती थी। मैंने वहाँ अपनी युवावस्था की लंबी अवधि बिताई थी। मैं एक साधारण आवास (dormitory) में रहती थी और नंगे पैर घूमने की सादगी और दैनिक ध्यान का वास्तव में आनंद लेती थी। डेनमार्क में बीते मेरे बचपन से यह बहुत अलग था। यह इंटरनेट से पहले की बात है; मैं अपने पिता को अपने अनुभवों को बताते हुए हस्तलिखित पत्र भेजती थी और कुछ सप्ताह बाद सामान्य डाक द्वारा उत्तर प्राप्त करती थी। वो भी क्या दिन थे!

मुझे एक पत्र विशेष रूप से याद है जिसमें मैंने अपने पिता को बताया था कि मैं उस समय अपने आध्यात्मिक गुरु, चारीजी, के साथ इतना समय बिता पाने पर कितनी भाग्यशाली महसूस करती थी। मैंने लिखा था कि मुझे लगता था कि मैं उस जादुई पल की हकदार नहीं थी जिसमें मुझ पर इतना ध्यान दिया गया। मैं उनकी उपस्थिति में रही और उसने मुझे अपने आंतरिक आयामों में जाने के लिए इस हद तक प्रेरित किया कि आज भी मुझ में वह चाह है।

मेरे पिताजी का उत्तर मेरी अपेक्षा से बहुत अलग था। उन्होंने बस इतना लिखा “मैं इसके लायक नहीं थी,” यही बात एक आध्यात्मिक गुरु को विशिष्ट बनाती है। वे तो वैसे भी देते ही हैं! वे कुछ ऐसा देते हैं जिसका कोई इंसान कभी हकदार नहीं हो सकता। मेरे पिताजी सलाह देते थे पर सलाह के रूप में नहीं। उन्होंने हमेशा हमें, मेरे भाई और मुझे, इसी तरह पाला है। वे चाहते थे कि हम बाहरी रूढ़ियों पर न जाकर अपने भीतर खोजें।

मैं हर दिन इस गहन ज्ञान के अनुसार जीती हूँ - “कोई भी इंसान उस चीज़ का हकदार नहीं हो सकता जो किसी भी कार्य या किसी भी विचार या किसी भी भावना से कहीं ज़्यादा बड़ी है।” यह विनम्रता जगाता है।

अप्रैल में मेरे पिताजी की किताब, “इन द लाइट अवेकनिंग” के विमोचन के बाद, मुझे अपने पत्रों के आदान-प्रदान को पुनः शुरू करने की प्रेरणा मिली, इस बार डेनमार्क के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में ईमेल के ज़रिए।

एमिली - नमस्ते पिताजी, आपकी नई किताब के विमोचन पर बधाई! हम सभी इस उपलब्धि के लिए बहुत खुश हैं और मैं कुछ सवाल पूछने के लिए उत्सुक हूँ। अगर आप अपने आध्यात्मिक गुरु, बाबूजी, के बारे में सिर्फ़ एक शब्द कह सकें कि वे आपके लिए क्या थे तो वह शब्द क्या होगा?

थॉमस - बनना।


लाभ और बनना साथ-साथ चलते हैं। बाबूजी हमेशा कहते थे, “‘आगे बढ़ते रहो।” युवा और वृद्धसभी - यह हमारी विशिष्टता है। तब हम एक हो जाएँगे।


एमिली - विकास की दृष्टि से हम इतने सारे सांसारिक और मानवीय संकटों के बीच जी रहे हैं और युवा लोगों के लिए शैक्षिक परियोजनाओं के साथ काम करते हुए मैं जानती हूँ कि आजकल युवा होना कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ‘बनना’ को किस तरह से प्रस्तुत किया जा सकता है जिससे आपके तीन पोते-पोतियाँ, जिनकी उम्र 16, 18 और 23 साल है और सभी अन्य युवा वर्तमान में लाभ उठा सकें?

थॉमस - लाभ और बनना साथ-साथ चलते हैं। बाबूजी हमेशा कहते थे, “आगे बढ़ते रहो।” युवा और वृद्ध, सभी - यह हमारी विशिष्टता है। तब हम एक हो जाएँगे।

एमिली - हर किसी को हमारे परिवार की तरह, आध्यात्मिक गुरुओं के साथ समय बिताने का अवसर न मिला है और न मिलेगा। जीवन में आपका सबसे अच्छा अनुभव क्या रहा होगा जिसमें आपको शाहजहाँपुर में बाबूजी के चरणों में बैठने के अलावा किसी अन्य तरीके से यह बनने का अनुभव हुआ हो? और ऐसा क्यों?

थॉमस - यह हमारे साथ हुआ। यह किसी के साथ भी हो सकता है। मैं 22 साल का था जब बाबूजी ने मुझे और तुम्हारी माँ को चुना। फिर तुमने, तुम्हारे भाई, तुम्हारी बहन और मेरे पोते-पोतियों ने मेरे जीवन को धन्य बना दिया। इससे बड़ी और क्या बात हो सकती है! मैं नाना-दादा बन गया।

एमिली - क्या बनने की भावना को स्वेच्छा से विकसित किया जा सकता है? कैसे?

थॉमस - जागरूक होकर।

एमिली - आपने हमेशा अपने समय से आगे का सोचा है। आपने 50 साल से भी पहले ध्यान करना शुरू किया था और अब हम देखते हैं कि दुनिया में ध्यान को प्रमुखता दी जा रही है। आपने मेरे भाई और मुझे एक प्रगतिशील स्कूल में डाला जहाँ की कार्य प्रणाली करुणा, एकजुटता और रचनात्मकता के मूल्यों पर आधारित थी। अब हम वैकल्पिक स्कूली शिक्षा प्रणाली को हर जगह उभरते हुए देखते हैं। अगर हम सांसारिक और मानवीय संकटों से पार पा लेते हैं तो आज से 50 साल बाद का भविष्य कैसा होगा?

थॉमस - ज़्यादा स्वाभाविक। अगर हम स्वाभाविक इंसान बनने की हिम्मत करते हैं तो हमें किसी भी और चीज़ की ज़रूरत नहीं है। इससे सब कुछ हल हो जाता है।

एमिली - आपके इस स्वप्न को साकार करने हेतु हमारे लिए सबसे ज़रूरी कौशल क्या है?

थॉमस - अपना सिर झुकाना और अपना दिल प्रकृति को समर्पित करना -आंतरिक और बाह्य, दोनों रूपों में।

एमिली - मुझे पता है कि आपके लिए हमेशा अपने तरीके से चलना आसान नहीं था। आपके माता-पिता 21 साल की उम्र में आपके भारत की यात्रा करने के पक्ष में नहीं थे। उस समय समाज में आप काफ़ी अलग थे, उसके बावजूद, आप अपनी इस आंतरिक खोज को जारी कैसे रख पाए?

थॉमस - मुझे ऐसा करना था। अतीत तो तब भी अतीत ही था। कौन अतीत में फँसे रहना चाहता है?

एमिली - जब आप इस दुनिया में नहीं रहेंगे तब आप किस बात के लिए याद किए जाना चाहेंगे? आप कौन सी कहानी चाहेंगे जो हम आपके बारे में लोगों को बताएँ?

थॉमस - मेरी कहानी नहीं, पूरी मानवता के लिए बाबूजी का महान संदेश फैलाओ।

एमिली - इस बात से मैं उत्सुक हो गई हूँ। मैं उस स्वप्न के प्रति समर्पण की स्थिति में रहने की बात को समझती हूँ, लेकिन अगर मैं अभी तक वहाँ नहीं पहुँची हूँ जहाँ मैं वास्तव में खुद को भूलने और कुछ बड़ा प्रकट होने देने में एक गहरा अर्थ महसूस कर सकूँ तो क्या किया जाए? आज की दुनिया में युवा लोग इसका लाभ कैसे उठा सकते हैं और सच्चाई की भावना के साथ कैसे जी सकते हैं?

थॉमस - दोनों पंखों से उड़कर, जैसा हम हार्टफुलनेस में कहते हैं - भौतिक पंख और आध्यात्मिक पंख। ध्यान हमें ऐसा करना सिखाता है।

एमिली - जब आप प्रकृति का ज़िक्र करते हैं तो मैं प्रेरित होती हूँ क्योंकि मैं पुनर्योजी शिक्षा के क्षेत्र में काम करती हूँ जहाँ हम संधारणीयता के बारे में सीखने के लिए प्रकृति को एक आदर्श के रूप में मानते हैं। जैव विविधता वास्तव में एक दृढ़ पारिस्थितिकी तंत्र की नींव है जिसका अर्थ है कि हम सभी अलग हैं और इसे हमारे संगठनों, स्कूलों, समाजों आदि में एक ताकत के रूप में देखा जाता है। जब हम इस अंतर या अलगाव को समझने लगते हैं तब हम एकात्मकता की बात कैसे सोच सकते हैं?

थॉमस - एकात्मकता सबसे पहले आती है। एकात्मकता हमारा स्वभाव है। बच्चों को खेलते हुए देखें। उनका वातावरण कितना सुंदर व दृढ़ है। वे लड़ते हैं और अपनी एकात्मकता को फिर से पा लेते हैं। यही हार्टफुलनेस ध्यान में निहित भावना है। हम सभी एक ही नाव में सवार हैं।

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एमिली - धन्यवाद पिताजी। ईश्वर करे कि आपकी पुस्तक में दिया गया ज्ञान कई लोगों के दिलों तक पहुँचे। ईश्वर करे कि इससे कुछ गहन आंतरिक चिंतन और बहुत सारी प्रेमपूर्ण, विद्रोही, आध्यात्मिक सक्रियता प्रेरित हो।

थॉमस - तुम्हें और बाकी सभी को प्रेमपूर्ण आलिंगन।

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थॉमस मोगेनसन

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