मेलिसा कॉनेली एक लेखिका और चिकित्सक हैं। उनका हाल ही का उपन्यास, ‘व्हाट वाज़ लॉस्ट’आघात और मुक्तिजोखिम लेने और अपनी देखभाल करनेशर्म और स्वीकृति के बारे में जानकारी देता है। यहाँ वे एक नई लेखिका के रूप में अपने अनुभव और कहानी साझा करने का महत्व बता रही हैं।

 

मेरा उपन्यास, ‘व्हाट वाज़ लॉस्ट’, मुख्य पात्र के जीवन में दो दर्दनाक घटनाओं से संबंधित है - मार्टी जब सात साल की थी तब एक दुर्घटना में उसका चेहरा विकृत हो गया था और चौदह साल की उम्र में उसका कला शिक्षक उसे प्रशिक्षण भी देता है और उसका यौन शोषण भी करता है जिससे वह गर्भवती हो जाती है। अपने अतीत का सामना करना मार्टी के लिए एक अंधकारपूर्ण और अशांत करने वाला सफ़र बन जाता है।

मैंने एक बाल चिकित्सक के रूप में काम किया है, लेकिन मैं मानसिक आघात के बारे में कोई बड़ी विशेषज्ञ नहीं हूँ। जैसा कि मार्टी कहती है, “हर किसी का अपना कटु अनुभव होता है।” कोई भी व्यक्ति जीवन बिना चोट खाए नहीं जीता। बेशक, इसका स्तर अलग-अलग होता है। कुछ लोग अपने जीवन में बार-बार अकल्पनीय त्रासदियों और दिल टूटने से पीड़ित होते हैं और उभर आते हैं। अन्य लोग छोटी-छोटी घटनाओं से भी हार मान लेते हैं। हम कभी-कभी इन लोगों को शिकायती कहते हैं। लेकिन हमें किसी के सहायता प्राप्त न कर पाने को आँकने का कोई हक नहीं है। भले ही उनके परेशान होने का कारण हमें मामूली लगे, लेकिन यह उनकी वास्तविकता है। उनका एहसास वे ही जानते हैं। कुछ लोग टूट जाते हैं जबकि अन्य उन्हीं परिस्थितियों में उठ खड़े होते हैं। ऐसा उनके साथ अतीत में हुई उपेक्षा, दुर्व्यवहार या बचपन के शुरुआती कटु अनुभवों के कारण हो सकता है। या यह उनकी रासायनिक संरचना के कारण भी हो सकता है। कुछ लोगों में अधिक दृढ़ता होती है और कुछ में उतनी नहीं होती। अगर आप में वह दृढ़ता है तो खुद को भाग्यशाली समझें। इसके बिना यह एक तरह का नरक है।

मेरे अनुभवों ने मुझे एक बात सिखाई है कि जिस तरह यदि हम इतिहास से कुछ नहीं सीखते तो हम उसे बार-बार दोहराते हैं, उसी तरह यदि हम अपने मानसिक आघात का सामना नहीं करते तो हम जीवन भर उसी मानसिक स्थिति में जीते हैं। शुरुआत में इससे उभारना बहुत मुश्किल हो सकता है और कभी-कभी हमें कुछ समय के लिए सदमा भी मिलता है। लेकिन अंततः इसका सामना करना ज़रूरी है अन्यथा यह आपके दिल के किसी गहरे व दुर्गंधित से कोने में पड़ा रहेगा और जब आपको इसकी उम्मीद सबसे कम होगी तब यह बाहर आकर आपको आहत करेगा।

मार्टी अपने द्वारा चुने गए मुश्किल विकल्पों के माध्यम से उस अनुभव को दोहराकर अपने आघात के प्रभाव को कम करने की कोशिश करती है। यौन शोषण पीड़ितों में यह आम बात है। वे सोचते हैं, “ठीक है। इसने मुझे प्रभावित नहीं किया। देखा? मैंने फिर से ऐसा किया!” वह अपने उत्पीड़क के साथ रहने की भी कोशिश करती है। वह ऐसा इसलिए करती है क्योंकि उसे इतनी शर्म आती है कि वह केवल उसी के साथ सुरक्षित महसूस करती है। यह असंगत लगता है लेकिन पीड़ितों के बीच यह आम बात है। यही कारण है कि यौन और शारीरिक शोषण करने वालों को अक्सर छोड़ दिया जाता है। लोग सोचते हैं कि वह उसके साथ रही, इसलिए यह इतना बुरा नहीं हो सकता।

मैं अपने जीवन में दर्दनाक घटनाओं से गुज़री हूँ और मेरा उनसे निपटने का एक तरीका था उन अनुभवों के बारे में बात करूँ। जितना ज़्यादा मैंने हर छोटी-छोटी बात बताई, जो शायद सुनने में मुश्किल लगी हो, पर उतनी ही ज़्यादा मेरी पीड़ा कम हुई। लेकिन मार्टी के पास यह सुविधा नहीं है। वह अपने साथ हुए दुर्व्यवहार में खुद को सहभागी मानती है। शर्म की वजह से ही लोग बातों को गुप्त रखते हैं और यही गुप्त शर्म है जिससे अपराधी अपने दुष्कर्मों से बच निकलते हैं।

किसी ने मुझसे कहा, “आपका संस्मरण प्रकाशित होने वाला है?” मैंने उन्हें सही किया, “नहीं, यह एक उपन्यास है।” उन्होंने जवाब दिया, “लेकिन यह आत्मकथात्मक है, है न? क्या सभी पहले उपन्यास ऐसे नहीं होते?” मुझे इस तरह की कई टिप्पणियाँ मिली हैं और मुझे उन्हें सही करने की तीव्र इच्छा होती थी। मेरे और मार्टी के जीवन में कुछ समानताएँ हैं - मैंने बहुत कम उम्र में घर और हाई स्कूल छोड़ दिया था, ठीक वैसे ही जैसे मार्टी ने किया। लेकिन उसकी कहानी मेरी नहीं है। चौदह साल की उम्र में किसी शिक्षक ने मेरा यौन शोषण नहीं किया।

मैं इस धारणा को सही करना चाहती थी क्योंकि मुझे मार्टी की शर्म महसूस हुई। इस एहसास से मुझे दुख हुआ और मैं खुद से थोड़ा निराश भी हुई। आखिरकार, मैंने यह कहानी यह दर्शाने के लिए लिखी थी कि इसमें कोई शर्म की बात नहीं है। मेरी बेचैनी मुझे इस बात का थोड़ा सा एहसास दिलाती है कि उसे कैसा महसूस होता होगा और अब मुझे मार्टी का बचाव करने की अधिक आवश्यकता महसूस होती है।

लिखने से अंदर की तीव्र भावनाएं बाहर निकल का आतघ, भले ही ओग आपकी अपनी कहानी न हो, क्यूंकी कुछ मायनों में यह हमेशा आपकी ही कघनी है| ऑब मानववि कहानी है।

मार्टी का मेरे द्वारा बचाव अहंकारी और अनावश्यक दोनों है। मार्टी खुद का बचाव ठीक से कर लेती है। तीस साल के लंबे अरसे तक अपने अनुभवों को दबाने के बाद वह उनका सामना करती है। वह पीड़िता के अस्तित्व से उभरकर फिर से जीना सीखती है। और अब जब मार्टी दुनिया में अपना कदम रख चुकी है तो मुझे लोगों को यह मानने देकर, कि यह मेरी कहानी है, अपनी स्वीकृति की यात्रा पर जाना होगा। मैंने इसे लिखा है और इसलिए यह मेरी है। मार्टी के साथ-साथ मैं भी उन मुद्दों और खुद के बारे में एक नई समझ विकसित कर रही हूँ जिनके बारे में मैंने लिखा है। इसका कारण है कि मैं अपनी लिखी, इस विचलित करने वाली किताब का समर्थन करती हूँ। लिखने से अंदर की तीव्र भावनाएँ बाहर निकल कर आती हैं, उनसे मुक्ति मिलती है, भले ही वह आपकी अपनी कहानी न हो, क्योंकि कुछ मायनों में यह हमेशा आपकी ही कहानी है। यह मानवीय कहानी है।

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