अष्टवर्ग मिश्रित च्यवनप्राश की शक्ति
इस लेख में श्रवण बांदा आज पूरे भारत में प्रचिलित सबसे आम घरेलू उपचारों में से एक - च्यवनप्राश - के बारे में बता रहे हैं। यद्यपि यह बहुत ही प्राचीन औषधि है, मगर आज भी वह उतनी ही लोकप्रिय है। यह हमारे प्रतिरक्षी तंत्र को बेहतर बनाने के लिए प्रसिद्ध है।
आयुर्वेद की प्राचीन और विस्तृत दुनिया में च्यवनप्राश एक ऐसा शक्तिशाली मिश्रण है जो 3000 वर्षों से अधिक समय से प्रभावकारिता की कसौटी पर खरा उतरा है। यह प्राचीन जड़ी-बूटियों से बना जैम सिर्फ़ एक स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ ही नहीं है अपितु हमारे प्रतिरक्षी तंत्र को बेहतर बनाने, हमारी स्फूर्ति बढ़ाने और संपूर्ण स्वास्थ्य में सहायता करने वाला एक सम्मानित स्वास्थ्य पूरक है।
अलग-अलग दौर से गुज़रता हुआ च्यवनप्राश का इतिहास
च्यवनप्राश की दंतकथा उतनी ही लुभावनी है जितने उसके फ़ायदे। वेदों के अनुसार महर्षि च्यवन, जो अपनी दीर्घायु के लिए जाने जाते थे, ने अपने यौवन को पुनः प्राप्त करने के लिए इस शक्तिशाली औषधि को बनाया था। च्यवनप्राश का पहला लिखित संदर्भ चरक संहिता में पाया गया है जो चौथी शताब्दी ईसापूर्व में लिखित आयुर्वेद का एक मौलिक ग्रंथ है। समय के साथ-साथ पूरे भारत में, प्रादेशिक विविधताओं के साथ, इसको बनाने की विधि भी विकसित हुई।
शुद्धता की शक्ति - सामग्री और विधि
बड़े ध्यान से चुनी हुई सामग्री ही च्यवनप्राश की आधारशिला है। आइए, इसकी कुछ प्रमुख सामग्री और इसको तैयार करने के परंपरागत तरीके पर नज़र डालें –
आँवला - यह अद्भुत फल, जिसे भारतीय करौंदा भी कहते हैं, इस पूरी प्रक्रिया में प्रमुख सामग्री है। इस फल में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। माना जाता है कि आँवला हमारी प्रतिरक्षी प्रणाली को मज़बूती देता है और हमारी बढ़ती हुई उम्र को स्वास्थ्यवर्धक बनाता है। (सिंह एवं अन्य, 2017)
अष्टवर्ग - यह आठ जड़ी-बूटियों का मिश्रण ही हमारे च्यवनप्राश की विशेषता है। परंपरागत तौर पर ये आठ जड़ी-बूटियाँ यष्टिमधु, पीपली, सौंठ, इलाइची, दालचीनी, कंटकारी, विदारीकंद और नागरमोथा हैं। मिश्रण में हर जड़ी-बूटी का अपना खास गुण होता है जिससे हमारे श्वसन स्वास्थ्य, पाचन क्रिया और संपूर्ण स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। (नाडकर्णी,1976)
शुद्ध शहद - यह सुनहरा अमृत न सिर्फ़ मिठास देता है बल्कि इसमें ज़ख्मों को भरने की और जीवाणुनाशक शक्ति भी है। (मीरशेकारी एवं अन्य, 2017)
बिलोना गिर गाय का घी - गिर गायों के दूध से बने घी के निराविषकारी और नवीनीकरण गुणों की आयुर्वेद में बड़ी मान्यता है। (लाड़, 2016)

च्यवनप्राश को बनाने की परंपरागत विधि में बहुत मेहनत लगती है। सारी सामग्री को बहुत अच्छी तरह साफ़ करके, सुखाकर पीसा जाता है। उस चूर्ण को फिर शहद में मिलाया जाता है और फिर धीमी आँच पर घी में घंटों पकाया जाता है। इस तरह धीमी आँच पर, धीरे-धीरे पकाने से जड़ी-बूटियों के सारे गुण मिश्रण में आ जाते हैं। साथ ही यह उत्पाद जल्दी खराब भी नहीं होता है।
प्राचीन विद्या के साथ आधुनिक विज्ञान - च्यवनप्राश के फ़ायदे
आधुनिक शोधकर्ताओं द्वारा च्यवनप्राश के फ़ायदों को लगातार मान्यता प्राप्त हो रही है। च्यवनप्राश का नियमित सेवन करने के कुछ संभावित फ़ायदों की एक झलक -
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है - च्यवनप्राश की सामग्री, खासकर आँवला और अष्टवर्ग जड़ी-बूटियाँ एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर हैं। इसलिए माना जाता है कि यह सामग्री मौसमी बीमारियों से हमारे शरीर को बचाने में मददगार होती है। (सिंह एवं अन्य, 2017)
○श्वसन स्वास्थ्य में सहायक होता है - पीपली और सोंठ जैसी कुछ जड़ी-बूटियाँ खाँसी और छाती में कफ भरे होने पर राहत दे सकती हैं। (सिंह व सिंह, 2011; श्रीवास्तव व सिंह, 2008)
○पाचन को बेहतर करता है - कुछ तरह के च्यवनप्राश में त्रिफला (तीन फल अमलाकी, बिभीतकी और हरितकी का मिश्रण) की मौजूदगी के कारण पाचन क्रिया में और आँतों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिलती है। (नाडकर्णी, 1976)
○ऊर्जा स्तर बढ़ाता है - अष्टवर्ग में मौजूद अश्वगंधा जैसी कुछ जड़ी-बूटियों के एडाप्टोजेनिक गुण (तनाव के प्रभावों का प्रतिकार करने वाले गुण) हमारी शक्ति को बढ़ा सकते हैं और थकान दूर करने में मदद कर सकते हैं। (अंदालु व कँवर, 2017)
च्यवनप्राश सेवन की विधि -
च्यवनप्राश एक बहु-उपयोगी स्वास्थ्य पूरक है जिसे आप बड़ी आसानी से अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं। आप इसे या तो रोज़ खाली पेट एक चम्मच सुबह और शाम खा सकते हैं या फिर इसे 100 मिलीलीटर गरम दूध या गरम पानी में घोलकर एक आरामदायक पेय की तरह ले सकते हैं।

सही च्यवनप्राश का चुनाव - उसकी गुणवत्ता पर एक नोट
ऐसा च्यवनप्राश लें जो -
कीटनाशक औषधियों और भारी धातुओं से मुक्त हो - ऐसे ब्रैंड चुनें जो शुद्धता को प्राथमिकता देते हैं और अपनी सामग्री का कड़ा परीक्षण करते हैं।
विशुद्ध जड़ी-बूटियों से बना हो - यह सुनिश्चित करें कि उसमें अष्टवर्ग शामिल है और उसमें डाली हुई जड़ी-बूटियाँ किसी विश्वस्त विक्रेता से ली गई हैं।
शुद्ध शहद से बना हो - ऐसा च्यवनप्राश लें जो एकदम शुद्ध शहद से बना हो या फिर उसमें न्यूनतम संसाधित शहद का इस्तेमाल किया गया हो ताकि फ़ायदा ज़्यादा से ज़्यादा हो।
परिरक्षकों (preservatives) या अन्य तरह के योगजों (additives) से मुक्त हो - ऐसा च्यवनप्राश चुनें जो प्राकृतिक और परंपरागत विधि से बनाया गया हो।
आप इस प्राचीन स्वास्थ्यवर्धक पदार्थ का पूरा-पूरा फ़ायदा तभी उठा पाएँगे जब आप शुद्धता और गुणवत्ता को प्राथमिकता देंगे।
च्यवनप्राश बनाने में भले ही पारंपरिक विधि सर्वोत्तम है, मगर आधुनिक अनुसंधानों ने इस प्राचीन औषधि की उपलब्धता को और भी आसान बना दिया है। आज जिन लोगों को खानपान में परहेज़ बताया गया हो, उन्हें चीनी-रहित च्यवनप्राश भी मिल जाएगा। और लोगों की सहूलियत के लिए बस एक वक्त में खत्म होने वाले छोटे पैकेट भी उपलब्ध हैं। लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि च्यवनप्राश में इस तरह के बदलाव करने से उसके पारंपरिक स्वाद और शक्ति में अंतर पड़ सकता है।
स्वाथ्य की एक परंपरा
च्यवनप्राश सिर्फ़ एक स्वादिष्ट जैम ही नहीं है बल्कि यह समग्र स्वास्थ्य का प्रतीक है और पीढ़ियों से ऐसा ही माना जाता रहा है। अपनी दिनचर्या में इसे शामिल करके आप आयुर्वेद के ज्ञान का फ़ायदा ले सकते हैं और अपने संपूर्ण स्वास्थ्य और स्फूर्ति को बनाए रख सकते हैं। याद रहे नियमितता महत्वपूर्ण है। अगर आप संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के साथ-साथ च्यवनप्राश का नियमित रूप से सेवन करेंगे तो यह आपको सशक्त बना सकता है।
यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि च्यवनप्राश शायद सबके लिए उपयुक्त न हो। जो व्यक्ति किसी खास बीमारी से पीड़ित हों या जो कुछ खास दवाइयाँ ले रहे रहे हों, उन्हें च्यवनप्राश का सेवन करने से पहले किसी आयुर्वेदाचार्य से सलाह ले लेनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, गर्भवती या अपने बच्चे को स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी सावधानी बरतनी चाहिए और च्यवनप्राश को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर ले लेनी चाहिए।
आज हमारी दुनिया हर समस्या के ‘शीघ्र समाधान’ पर केंद्रित है। ऐसे में च्यवनप्राश प्राचीन पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति की चिरस्थायी शक्ति का एक प्रभावशाली प्रतीक है। शुद्ध शहद, घी और प्रभावकारी जड़ी-बूटियों के मिश्रण द्वारा चवनप्राश का सेवन हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखने का एक प्राकृतिक और स्वादिष्ट तरीका है।
यह प्राचीन जड़ी-बूटियों से बना जैम सिर्फ़ एक स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ ही नहीं है अपितु हमारे प्रतिरक्षी तंत्र को बेहतर बनाने, हमारी स्फूर्ति बढ़ाने और संपूर्ण स्वास्थ्य में सहायता करने वाला एक सम्मानित स्वास्थ्य पूरक है।
च्यवनप्राश एक बहु-उपयोगी स्वास्थ्य पूरक है जिसे आप बड़ी आसानी से अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं।
च्यवनप्राश प्राचीन पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति की चिरस्थायी शक्ति का एक प्रभावशाली प्रतीक है। शुद्ध शहद, घी और प्रभावकारी जड़ी-बूटियों के मिश्रण द्वारा चवनप्राश का सेवन हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखने का एक प्राकृतिक और स्वादिष्ट तरीका है।

श्रवण बांदा
श्रवण की विशेषज्ञता आर्द्ररभूूमि का निर्मााण और अपशिष्ट जल चुनौतियोंं का समाधान करना है। वे आईजीबीसी द्वारा मान्यता प्राप्त एक ग्रीन बिल्डिंग प्रोफेशनल याानी हरित भवन व्यवसायी और 'सोसाइटी ऑफ वेटलैंंड साइंंटिस्ट्स', यूएसए के सदस्य हैं। उन... और पढ़ें
