बी. रतिनसबापति फ़ॉरेस्ट्स बाई हार्टफुलनेस में पारिस्थितिकीविद् हैं। वे आसन मंडल उद्यान के निर्माण के बारे में बता रहे हैं जो वैदिक ज्ञानपवित्र ज्यामिति और पर्यावरण के सामंजस्य का सम्मिश्रण है। इस जीवित मंडल के रूप में साधकों को ध्यानरूपांतरण और प्रकृति की लय के साथ तालमेल बनाने के लिए एक स्थान मिल जाता है।

 

सन मंडल उद्यान एक वृक्ष मंदिर है जिसमें पवित्र ज्यामिति एवं प्रकृति की गहन आध्यात्मिक सहक्रिया देखने को मिलती है। इसमें सभी प्राचीन व आधुनिक संस्कृतियों की परंपराओं के आधारभूत प्रतीकों - चौकोर यानी चतुर्भुज और वृत्ताकार को शामिल किया गया है। संस्कृत दर्शन के अनुसार चतुर्भुज स्थिरता, संरचना और पृथ्वी के क्षेत्र को दर्शाता है जबकि वृत्ताकार (मंडल) पूर्णताब्रह्मांडीय एकता और जीवन के अनंत चक्र का प्रतीक है। उनका सामंजस्यपूर्ण एकीकरण आध्यात्मिक ऊर्जा को प्रवाहित करता है जिससे इस मंदिर में पंचतत्व अर्थात पंचभूत (धरती, अग्नि, जल, वायु और आकाश) में तालमेल स्थापित होता है। इससे वातावरण ध्यान एवं आंतरिक रूपांतरण के अनुकूल बन जाता है।

प्रकृति में शरणस्थल

हैदराबाद के निकट हार्टफुलनेस के शांतिमय मुख्यालय, कान्हा शांतिवनम्, में प्रकृति प्रचुरता में फल-फूल रही है। निवासी और आगंतुक दोनों ही यहाँ के हरे-भरे परिदृश्य को देखकर आनंदित होते हैं। हालाँकि औपचारिक यात्रा उद्यान और उष्णकटिबंधीय वर्षावन को बहुत पसंद किया जाता है, फिर भी ऐसे कुछ अद्भुत स्थान हैं जिनके बारे में ज़्यादा लोग नहीं जानते लेकिन वहाँ बैठकर लोग आत्मचिंतन कर सकते हैं। ऐसा ही एक पवित्र स्थान है वृक्ष मंदिर जो नर्सरी के थोड़ा आगे एक विशिष्ट मंडल-प्रेरित उपवन है।

वृक्ष मंदिर के मध्य में एक कमल ताल है जिसके आसपास एक ज्यामितीय व्यवस्था में बकुल वृक्षों को लगाया गया है। इसके चार प्रवेश द्वारजो खड़े पत्थरों की जोड़ी द्वारा चिन्हित हैं, इस शांतिमय आश्रय में साधकों को आमंत्रित करते हैं। यहाँ एक परिक्रमा मार्ग है जिस पर आप प्रकृति के संतुलन की लय में डूबे हुए शांति से चिंतन करते हुए चल सकते हैं।

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मंदिर की रूपरेखा में ज्यामिति की भूमिका

महान मंदिर अत्यधिक सरलता से उत्पन्न होते हैं। जिस तरह एक महान वृक्ष एक छोटे से बीज से उत्पन्न होता है, उसी तरह प्राचीन भारत देश के वास्तुशिल्प चमत्कारों के प्रारंभ का पता एकल, शक्तिशाली बिंदु से लगाया जा सकता है। (संस्कृत शब्द ‘बिंदु’ का अर्थ है एक स्थलचिन्ह या बीज।) वृक्ष मंदिर की परिकल्पना इसी भावना से की गई थी। पारंपरिक मंदिरों के विपरीत, जिन्हें पत्थर पर तराशने में वर्षों लग जाते हैं, इस जीवित मंदिर को 10 महीने में बनाकर वर्ष 2024 शुरू होते ही प्रस्तुत किया गया।

यहाँ यूक्लिडियन ज्यामिति के शाश्वत सिद्धांत सरल रूपों से लेकर जटिल संरचनाओं तक के बदलावों में मार्गदर्शन करते हैं। वृक्ष मंदिर बनाने के लिए हमने एक पारंपरिक तरीका अपनाया - इसकी शुरुआत 10x10 के चौकोर जालीनुमा ढाँचे का आसन मंडल बनाने से हुई। हमने ध्यानपूर्वक उन प्रमुख तत्वों को चुना जो प्राचीन मंदिरों के पवित्र अनुपात को प्रतिबिंबित करते हैं। चरण दर चरण यहाँ का रूपांतरण दिखने लगा - ऐसी प्रगति जो प्राचीन काल के प्रमुख मंदिर निर्माताओं अर्थात स्थापतियों के तरीकों के समान लग रही थी।

परंपरा के प्रति जीवित श्रद्धांजलि

हालाँकि स्थापति अपनी रचनाएँ असाधारण रूप से जटिल बनाते चले गए, हमने इसके लिए एक सरल व अधिक प्राकृतिक मार्ग चुना। हमारा वृक्ष मंदिर पवित्र ज्यामिति के प्रति विनम्र और गहन श्रद्धांजलि के रूप में खड़ा है जो प्रकृति को इसके स्वरूप में जीवन का संचार करने के लिए आमंत्रित करता है। यहाँ देवताओं या प्रकृति की आत्माओं की अदृश्य ऊर्जाओं का वास है। देवता इस पवित्र उपवन को अपनी सूक्ष्म बुद्धिमत्ता एवं असीम कृपा का आशीर्वाद देते हैं। वृक्षों के रूप में मौजूद यह मंदिर मात्र एक संरचना नहीं है; यह एक अनुभव है। यह एक ऐसा स्थान है जहाँ धरती और आकाश सामंजस्य में मिलते हैं, जहाँ मौन भी कुछ कहता है और जहाँ प्रकृति के शाश्वत आलिंगन में आत्मा को सुकून मिलता है।

 

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उद्यान का आरंभ

दिसंबर 2023 में एक विशेष क्षेत्र, जो कभी कान्हा शांतिवनम् की बंजर व बेकार भूमि थी, एक हरी-भरी आर्द्रभूमि के रूप में विकसित हुआ। सबसे पहले नर्सरी के क्षेत्र के अंत में हमने तालाब बनाने के लिए खुदाई की। फिर डॉ. वी. रमाकांत ने हमारा परिचय वृक्ष मंदिर की डिज़ाइन के लिए प्रसिद्ध, अमेरिका के पॉल ग्लॉसप से कराया जो इस तालाब के क्षेत्र को देखने आए। इसके सौंदर्य से मंत्रमुग्ध, पॉल ने डॉ. वी. रमाकांत से अपना ज्ञान साझा किया जिसमें उन्होंने कहा, “ज्यामितीय भाषा एक ऐसी भाषा है जिसे हिंदु, मुस्लिम, बुद्ध और ईसाई, सभी पसंद करते हैं। ज्यामिति एक ऐसी मूलभूत भाषा है जो सभी लोगों व चीज़ों को एक करने में मदद करती है। यह लोगों को अपने दिलों से पुनः जोड़ सकती है। अतः निश्चित रूप से इसका संबंध हार्टफुलनेस से है। एक वृक्ष को क्या चाहिए? पानी, हवा, मिट्टी, सूरज की रौशनी और मनुष्यों का प्रेम। यदि हम वृक्षों को थोड़ा और देना चाहते हैं तो हम उसे एक मंदिर का हिस्सा बनाते हैं जिसे हम वन हृदय कहते हैं। हृदय में चार कक्ष होते हैं, इसलिए हमारे वन हृदय में भी चार कक्ष हैं - पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण, प्रत्येक दिशा में एक। मोक्ष प्राप्त करने के लिए आध्यात्मिक भक्त के पास एक हृदय होना चाहिए। एक वन को अपना उद्देश्य पूरा करने के लिए उसमें वन हृदय होना चाहिए।”

इस प्रकार आसन मंडल उद्यान की अवधारणा उभर कर आई। आर्किटेक्ट दीपिका पोथुराजू को साइट का सीमांकन करने का काम सौंपा गया और उनकी सर्वेक्षण टीम को साइट आंकलन के काम पर लगाया गया। प्रबंधकों से मंज़ूरी मिलने के बाद आधारभूत कार्य शुरू हुआ, जिससे आध्यात्मिक रूप से समृद्ध परिदृश्य बनाने की नींव रखी गई।


आसन मंडल उद्यान को एक गहन उद्देश्य से बनाया गया है। यह एक शरणस्थल है जहाँ अध्यात्म और पर्यावरण का सामंजस्य है। यह साधकों को जीवन की पवित्र ज्यामिति में डूब जाने के लिए आमंत्रित करता है जिससे संतुलनशांति एवं ब्रह्मांड से जुड़ाव की उनकी आंतरिक यात्रा तेज़ हो जाए।


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डिज़ाइन और आध्यात्मिक तालमेल

मंडल उद्यान पवित्र स्थान होते हैं जिन्हें ध्यान व आध्यात्मिक तालमेल को सुगम बनाने के लिए बनाया जाता है। आसन मंडल उद्यान इस सत्व को साकार करता है। यह एक केंद्रीय तालाब के आसपास बनाया गया है जो प्राकृतिक जलाशयों से प्रेरणा प्राप्त करता है। इस शांतिमय मध्य स्थल के चारों ओर पवित्र पौधे लगे हैं जैसे बकुल, चंदन और मालाबार चमेली जो यहाँ के वातावरण को और भी बेहतर बना देते हैं। ये प्रजातियाँ शुद्धता, भक्ति और दिव्य सुगंध की प्रतीक हैं जिससे प्रकृति व ब्रह्मांड के साथ जुड़ाव और भी गहरा होने लगता है।

यहाँ की पवित्र व्यवस्था योगिक सिद्धांतों के साथ मेल खाती है जिसमें चौकोर आसन की स्थिरता दर्शाता है और वृत्ताकार प्राण के सतत प्रवाह का प्रतीक है। यह अनोखा उद्यान गहन चिंतन करने का स्थान है जो भौतिक, आध्यात्मिक और ब्रह्मांडीय आयामों को आपस में मिलता है।

 

 

 

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आध्यात्मिक जाग्रति के लिए एक जीवित मंडल

डॉ. रमाकांत के मार्गदर्शन के साथ-साथ पॉल व आर्किटेक्ट दीपिका के सैद्धांतिक योगदान और फ़ॉरेस्ट्स बाई हार्टफुलनेस की टीम की सहायता से आसन मंडल उद्यान प्राचीन ज्ञान को आधुनिक पर्यावरणीय चेतना के साथ जोड़ता है। यह इस बात के एक प्रमाण के रूप में मौजूद है कि अध्यात्म एवं संधारणीयता एक साथ रह सकते हैं। यह साधकों को एक जीवंत व जीता-जगता मंडल प्रदान करता है।

आसन मंडल उद्यान को एक गहन उद्देश्य से बनाया गया है। यह एक शरणस्थल है जहाँ अध्यात्म और पर्यावरण का सामंजस्य है। यह साधकों को जीवन की पवित्र ज्यामिति में डूब जाने के लिए आमंत्रित करता है जिससे संतुलन, शांति एवं ब्रह्मांड से जुड़ाव की उनकी आंतरिक यात्रा तेज़ हो जाए। जैसे-जैसे यह उद्यान फल-फूल रहा है, यह प्रकृति और दिव्यता के बीच शाश्वत सहक्रियता के प्रतीक के रूप में मौजूद है, जिससे इसके पवित्र पथ पर चलने वाले सभी लोग प्रेरित होते हैं।


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