बी. रतिनसभापतिकान्हा शांतिवनम् में फ़ॉरेस्ट्स बाई हार्टफुलनेस में कार्यरत एक पारिस्थितिकीविद् हैं। वे हमें अफ़्रीका और मैडागास्कर से लेकर प्रशांत क्षेत्र से होते हुए दक्षिण एशिया के प्रांतों में पाए जाने वाले मर्टिल परिवार के सिज़िजियम के वृक्षों की विभिन्न भारतीय देशज प्रजातियों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। इनमें सबसे प्रसिद्ध प्रजाति है लौंग की (सिज़िजियम एरोमेटिका) जो मूलतः इंडोनेशिया में पैदा होती है। लेकिन इस लेख में वे बहुप्रचलित जामुन के वृक्ष व कुछ अन्य प्रजातियों की चर्चा कर रहे हैं जिनमें औषधीय गुण भी हैं।

 

भारत में जामुन (सिज़िजियम क्यूमिनी), जो ब्लैक प्लम या इंडियन ब्लैकबेरी के नाम से भी जाना जाता है, अपने पौष्टिक तत्वों, औषधीय गुणों और सांस्कृतिक महत्व के कारण एक बहुत ही मान्यता प्राप्त फल है। यह मूलतः भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाता है। यह वृक्ष उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु में अच्छे से फलता-फूलता है और विशेषकर वर्षा ऋतु में इसका फल बहुत लोगों का पसंदीदा फल होता है। इसके खट्टे-मीठे स्वाद और गहरे जामुनी रंग के कारण इसे देश भर में बहुत महत्व दिया जाता है।

भारत में उपलब्ध जामुन के विविध प्रकार

भारत में जामुन की अनेक किस्में पाई जाती हैं जिन्हें विभिन्न प्रादेशिक जलवायु और पसंद के अनुसार लगाया जाता है। भारत में पाई जाने वाली जामुन की सभी किस्में सिज़िजियम क्यूमिनी प्रजाति के अंतर्गत ही आती हैं, लेकिन कई स्थानों पर प्रादेशिक क्षेत्र, विशेषताओं और वहाँ हुए कृषि उद्योग में उन्नति के अनुसार जामुन की कुछ विशेष किस्में उगाई जाती हैं -

  1. राजा जामुन - यह अपने बड़े आकार, गहरे जामुनी रंग और छोटे बीज के लिए जाना जाता है। इसे उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में बड़ी तादाद में उगाया जाता है। अपने रसीले गूदे और संतुलित मिठास के कारण यह बेहद लोकप्रिय है।
  2. नरेंद्र जामुन - इसे फ़ैज़ाबाद में स्थित नरेंद्र देव कृषि और प्रौद्योगिकी महाविद्यालय द्वारा विकसित किया गया है। यह जामुन अपनी अत्यधिक पैदावार और बीमारियों से अपने आप को बचाने की क्षमता के लिए जाना जाता है। इस वृक्ष के फल आकार में बड़े और स्वादिष्ट होते हैं।
  3. जंबो जामुन - इस वृक्ष के फल आकार में बहुत बड़े होते हैं और इनका गूदा बीज की तुलना में बहुत ज़्यादा होता है। यह दक्षिण भारत में व्यावसायिक कृषि के लिए बहुत प्रचिलित है।
  4. बीजरहित जामुन - यह एक नई नस्ल है और आजकल शहरी उत्पादकों द्वारा काफ़ी पसंद की जा रही है। यह जामुन स्वाद में बहुत मीठा और खाने में आसान होता है।
  5. कोंकण बहाडोली - यह मूलतः कोंकण प्रदेश में पैदा होता है। यह मध्यम आकार की किस्म अपने तीखे स्वाद और तटीय जलवायु में पनपने की अपनी अनुकूलन क्षमता के लिए जानी जाती है।
  6. छत्तीसगढ़ जामुन - ये जामुन ज़्यादातर जंगली होते हैं लेकिन कभी-कभी घरेलू वातावरण में भी पनपते हैं। इनका आकार छोटा होता है, लेकिन ये एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं। पारंपरिक औषधियों में प्रायः इनका उपयोग किया जाता है।

स्वास्थ्य लाभ

जामुन पौष्टिक तत्वों से भरपूर होते हैं। इसमें विटामिन सी, आयरन, पोटेशियम और फ़ाइबर प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। रक्त शर्करा के स्तर को नियमित करने के लिए यह फल विख्यात है और इसलिए यह मधुमेह के लिए एक प्राकृतिक उपचार है। इसके बीजों से बने चूर्ण का उपयोग आयुर्वेद में पाचन शक्ति बढ़ाने और शर्करा चयापचय को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। इनके अतिरिक्त जामुन हृदय के स्वास्थ्य, यकृत यानी लिवर की कार्यक्षमता और त्वचा के नवीनीकरण में भी उपयोगी है।

जामुन के अलावा भी सिज़िजियम की कुछ अन्य जातियाँ भारत में पाई जाती हैं, विशेषकर पश्चिमी घाट और अंडमान द्वीप समूह में। इनके फल खाए भी जा सकते हैं और साथ ही इनका औषधियों में भी उपयोग किया जाता है।

  1. सिज़िजियम क्यूमिनी - इनके फलों का उपयोग मधुमेह, दस्त और पाचन संबंधी विकारों के उपचार में किया जाता है। इनके बीजों में रक्त शर्करा को कम करने के गुण होते हैं।
  2. सिज़िजियम पालघटेंस - इसके फल खाने योग्य हैं और इनमें एंटीऑक्सीडेंट के गुण हैं।
  3. सिज़िजियम सिंगमपट्टियाना- यह स्थानीय वृक्ष है। इसके फल खाने योग्य होते हैं। इनके औषधीय गुणों पर अभी शोध जारी है।
  4. सिज़िजियम जंबोज़- यानी रोज़ एप्पल जिसका उपयोग पाचन संबंधी समस्याओं और सूजन में किया जाता है।
  5. सिज़िजियम मलैसन- यानी मलय एप्पल, पाचन क्रिया में मदद करता है और रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
  6. सिज़िजियम ज़िलैनिकम- इसमें सूक्ष्मजीवरोधी गुण हैं; इसकी छाल और पत्तों का औषधि बनाने के लिए उपयोग किया जाता है।
  7. सिज़िजियम ट्रैवनकोरीकम- यह एक संकटग्रस्त नस्ल है। इसके फल खाने योग्य होते हैं और इनमें सूक्ष्मजीवरोधी गुण होते हैं।
  8. सिज़िजियम कैरीयोफ़ाइलेटम- इसके फल खाने योग्य होते हैं। ये फल एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं और इनका उपयोग संक्रमण के उपचार में किया जाता है।
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Syzygium cumini

 

ये सभी प्रजातियाँ एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती हैं और इनमें सूक्ष्मजीवरोधी एवं सूजनरोधी गुण होते हैं। पारंपरिक औषधियों में इनका बहुत उपयोग किया जाता है। कान्हा शांतिवनम् में ये सारी प्रजातियाँ मौजूद हैं। इनमें से आखिरी दो पहले संकटग्रस्त थीं लेकिन हार्टफुलनेस के ट्री कंज़र्वेशन सेंटर की टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला में उन्हें उगाया गया है। यह सेंटर दुर्लभ, संकटग्रस्त और औषधीय पेड़-पौधों को अलग-अलग जगहों में उगाता है ताकी उनकी सुरक्षा और पारिस्थितिक प्रभाव, दोनों को सुनिश्चित किया जा सके।

सांस्कृतिक महत्व

भारतीय पौराणिक कथाओं में जामुन का श्रीकृष्ण से बहुत गहरा संबंध है। माना जाता है कि जामुन फल का गहरा जमुनी रंग श्रीकृष्ण की त्वचा से मिलता-जुलता है। लोक कथाओं के अनुसार कृष्णजी वृंदावन में गाय चराते समय प्रायः जामुन के वृक्ष के नीचे आराम करते थे।

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Syzygium singampattiana 
(Jungle guava)

 

एक लोकप्रिय कथा के अनुसार ऊँची टहनियों से लटकी माखन की हांडियों से माखन चुराने के लिए वे जामुन के वृक्ष पर चढ़ा करते थे। जामुन के वृक्ष के साथ कृष्ण का चंचल रिश्ता उनका प्रकृति और गाँव की सादगी भरे जीवन के साथ एक गहरा संबंध दर्शाता है। साथ ही यह भी कहा जाता है की यह वृक्ष सबको छाया और आश्रय देता है जो कृष्ण के संरक्षक और पालन-पोषण करने वाले गुणों का प्रतीक है।

जामुन के वृक्ष का बहुत ही गहरा आध्यात्मिक महत्व है। शैव मत में भी जामुन को पवित्र माना जाता है। यह अक्सर शिव मंदिरों में पाया जाता है तथा शांति और ज्ञानोदय का प्रतीक माना जाता है। जैन लोग भी जामुन के वृक्ष को पूजनीय मानते हैं क्योंकि उनके नौवें और तेरहवें तीर्थांकर, सुविधिनाथ और विमलनाथ ने इसी वृक्ष के नीचे आध्यात्मिक जागृति प्राप्त की थी। यह वृक्ष ध्यान से जुड़ा है क्योंकि इसकी घनी छाँव आत्म-अवलोकन और आत्मिक शांति बढ़ाती है। जामुन का वृक्ष ध्यान, ज्ञानातीत्व और ईश्वर के साथ एकलय होने का एक जैविक प्रतीक है। यह घरों के बगीचों में और सामूहिक स्थलों में अक्सर पाया जाता है जो उसकी जीवंतता और प्रचुरता को दर्शाता है।

अवसर और चुनौतियाँ

जामुन की खेती काफ़ी चुनौतीपूर्ण हो सकती है, जैसे उसका मौसम पर निर्भर होना, तोड़ने के बाद ज़्यादा देर न टिकना और संगठित विपणन (organized marketing) का अभाव होना। लेकिन जामुन से होने वाले स्वास्थ्य लाभ के बारे में बढ़ती जागरूकता के कारण उससे बनाए हुए उत्पादों जैसे जामुन का रस, सिरका, उसके बीजों का चूर्ण आदि के लिए बाज़ार में भारी माँग है। इससे इसके कृषि व्यवसाय की अपार संभावनाएँ पैदा होती हैं।

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Syzygium samaragense var alba

 

भारत में उपलब्ध जामुन की विभिन्न किस्में, इस देश के कृषि उद्योग की प्रचुरता और उसकी जैव विविधता को दर्शाती है। पारंपरिक बगीचों से लेकर अत्याधुनिक बागान तक, जामुन ने अपनी लोकप्रियता बनाए रखी है। यह फल स्वास्थ्य, संस्कृति और स्वाद का अद्भुत संगम है। संधारणीय कृषि और मूल्य-वर्धित उत्पादों को बढ़ावा देने से हम जामुन की परंपरा को वैश्विक बाज़ार तक पहुँचा सकते हैं और इस तरह हम उसके वास्तविक भारतीय अति-पौष्टिक फल होने के महत्व को और बढ़ा सकते हैं।

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Syzygium alternifolium

 

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Syzygium caryiphyllatum (South Indian plum)

 


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बी. रतिनसभापति

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