पारिस्थितिकीविद् बी. रतिनसबापति अपने इस लेख में कान्हा शांतिवनम् में पाए जाने वाले भारतीय गिरगिट के रहने के तरीके को आध्यात्मिक साधना से जोड़ते हैं – जिसमें वातावरण के अनुकूल बनना और धैर्य व एकाग्रता विकसित करना शामिल है।
भेष बदलने में माहिर
गिरगिट प्रकृति में पाए जाने वाले सबसे आकर्षक सरीसृपों (reptiles) में से हैं। ये अपने रंग बदलने और अपने आसपास के वातावरण में बहुत ही आसानी से घुलमिल जाने की योग्यता के लिए जाने जाते हैं। हालाँकि गिरगिट की अधिकतर प्रजातियाँ अफ़्रीका में पाई जाती हैं, खासकर मैडागासकर में, लेकिन वे यूरोप और एशिया के भी कुछ भागों में पाई जाती हैं जिनमें भारत व श्रीलंका भी शामिल हैं। जंगलों में रहने वाले अन्य गिरगिटों के विपरित, इनकी कुछ प्रजातियाँ रेतीले नामीब रेगिस्तान जैसे कठिन परिस्थिति वाले पर्यावरण में भी सफलतापूर्वक विकसित हो गई हैं। वहाँ उन्होंने ज़मीन पर ही रहने के लिए खुद को ढाल लिया है।
भारत में इसकी सिर्फ़ एक ही प्रजाति पाई जाती है - भारतीय गिरगिट (कैमीलियो जैलेनिकस)। यह दिनचर छिपकली धीरे-धीरे चलती है और अपनी असाधारण छलावरण की क्षमता की मदद से अपने शिकारियों से बच निकलती है और अपने शिकारों को सटीकता से पकड़ लेती है। अपने आश्चर्यजनक जैविक गुणों के अलावा गिरगिट धैर्य, अनुकूलन क्षमता और अंदरूनी जागरूकता का प्रतीक है - ऐसे गुण जो आध्यात्मिक साधकों में भी होते हैं।

कान्हा के गिरगिट - समरसता के प्रतीक
कान्हा शांतिवनम् एक आध्यात्मिक और पारिस्थितिक अभ्यारण्य है जो आंतरिक रूपांतरण और पर्यावरण के संरक्षण के प्रति समर्पित है। यहाँ पर गिरगिट सूखी, कंटीली झाड़ियों के जंगल में छुपे हुए रत्नों की तरह प्रकट होते हैं। वर्षा ऋतु के बाद गिरगिट के बच्चे तो अपने आसपास के परिवेश में घूमते हुए, उसे जानने की कोशिश करते हुए नज़र आते हैं, लेकिन वयस्क गिरगिट आसानी से दिखाई नहीं देते। जब उन्हें खतरे का आभास होता है तब वे सावधानी से धीरे-धीरे रेंगते हुए थोड़ा दूर जाते हैं और फिर पत्तियों और टहनियों के बीच बड़ी ही खूबसूरती से घुल-मिलकर वातावण में गायब हो जाते हैं। इस तरह देखते ही देखते गायब हो जाने की इनकी काबिलियत ही इन्हें भारत में पाए जाने वाले सबसे ज़्यादा दिलचस्प सरीसृप बनाती है।
जिस तरह से गिरगिट बड़ी ही आसानी से अपने परिवेश के अनुसार ढल जाता है, उसी तरह से कान्हा में आए हुए आध्यात्मिक साधक भी सजगता विकसित करके एवं पर्यावरण के साथ गहराई से जुड़कर प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना सीख जाते हैं। आसानी से पकड़ में न आने वाले इन जीवों को ध्यान से देखना हमें याद दिलाता है कि किस तरह से स्थिरता, धैर्य और जागरूकता व्यक्ति के जीवन के अनुभव को बदल सकते हैं।
आसानी से पकड़ में न आने वाले इन जीवों को ध्यान से देखना हमें याद दिलाता है कि किस तरह से स्थिरता, धैर्य और जागरूकता व्यक्ति के जीवन के अनुभव को बदल सकते हैं।
उत्तम वृक्षवासी शिकारी
गिरगिट पेड़ों पर जीने वाले जीव हैं। उनकी लंबी टाँगे और युग्मांगुलीय (zygodactylous) पंजे होते हैं यानी दो उंगलियाँ सामने की ओर और दो पीछे की ओर होती हैं। इससे वे टहनियों को मज़बूती से पकड़ पाते हैं। उनकी मज़बूत पकड़ वाली पूँछ भी उन्हें संतुलित व स्थिर रहने में मदद करती है। गिरगिट एक विशिष्ट तरह से झूमते हुए चलते हैं जिसमें वे आगे-पीछे इस तरह हिलते हैं जैसे हवा में पत्तियाँ हिलती हैं। उनका धीमे और सावधानीपूर्वक चलना उन्हें शिकारी और शिकार, दोनों की नज़रों से छिपने में मदद करता है। यह एक ध्यानमयी साधना की शांति और अनुशासन को दर्शाता है।
घातक व सटीक प्रहार
अपनी धीमी चाल के बावजूद, गिरगिट बेहद कुशल शिकारी होते हैं। इसकी वजह उनकी आश्चर्यजनक रूप से तेज़ व प्रक्षेप्य जैसी जीभ है। गिरगिट की जीभ उसके शरीर की लंबाई से डेढ़ गुना दूरी तक जा सकती है। यह इतनी तेज़ी से बाहर निकलती है जैसे किसी कार की गति एक ही पल में शून्य से 60 किलोमीटर प्रति घंटा हो जाए। यह अद्भुत क्रिया उसकी त्वरक (accelerator) माँसपेशी जो उसकी जीभ को तेज़ी से आगे की ओर फेंकती है और आकुंचक (retractor) माँसपेशी जो तेज़ी से अपने शिकार सहित उस जीभ को वापस खींच लेती है, द्वारा होती है।
इस कुशलता को और भी प्रभावी बनाता है गिरगिट का अत्यंत चिपचिपा लार, जो मानव लार की तुलना में लगभग हज़ार गुना अधिक चिपचिपा होता है। इसके कारण टिड्डों तितलियों और व्याध-पतंगों जैसे सबसे तेज़ उड़ने वाले कीड़े भी बच नहीं पाते।
सर्वश्रेष्ठ शिकारी के लिए 360 - डिग्री दृष्टि
गिरगिट के पास एक और असाधारण क्षमता होती है - उसकी एक-दूसरे से अलग दिशा में घूमती आँखें। वे एकसाथ दो अलग-अलग दिशाओं में घूमकर बारीकी से देख सकती हैं। इस क्षमता के कारण गिरगिट लगभग 360 डिग्री के घेरे में देख सकते हैं। लेकिन जब वे अपने शिकार की ओर देखते हैं तब दोनों आँखें एक ही ओर रहती हैं ताकि उन्हें अपने शिकार की दूरी की सटीक समझ मिल पाए जिससे उनकी लंबी जीभ अपने शिकार पर सटीक वार कर सके। बिरले ही ऐसा होता है कि गिरगिट शिकार करने से चूक जाए। इस कारण से गिरगिट सरीसृप जगत का सबसे खतरनाक शिकारी माना जाता है।
प्रकृति का जीवित अचंभा - एक आध्यात्मिक दृष्टिकोण
गिरगिट प्रकृति की अद्भुत रचनात्मकता का प्रमाण हैं। इस एक प्रजाति में, छलावरण, तेज़ दृष्टि और शिकार की सटीकता जैसी असाधारण क्षमताएँ समाहित हैं। चाहे वह पेड़ों में धीरे से झूल रहा हो या अपनी बिजली सी तेज़ जीभ निकाल रहा हो, यह सरीसृप उन सभी लोगों को मंत्रमुग्ध और प्रभावित करता है जिन्हें इन जीवों को जंगल में देखने का सौभाग्य प्राप्त होता है।
कान्हा शांतिवनम् में, जहाँ आध्यात्मिकता और संरक्षण का मिलन देखने को मिलता है, गिरगिट की मौजूदगी प्रकृति के नाज़ुक संतुलन और दृढ़ता की याद दिलाती है। वह हमें धैर्य, एकाग्रता और अनुकूलन क्षमता की कला सिखाती है। ये ऐसे गुण हैं जो न सिर्फ़ प्राणी-जगत के लिए बल्कि स्वयं को जानने के लिए भी ज़रूरी हैं। जैसे-जैसे जिज्ञासु अपने आपको प्रकृति की लय के साथ स्वयं को समायोजित करना सीखते हैं, गिरगिट उनके लिए सजग जीवन के प्रतीक के रूप में उभर आता है जो अपने आंतरिक उद्देश्य को हमेशा ध्यान में रखते हुए अपने आसपास के वातावरण के साथ आसानी से अपने आप को ढाल लेता है।


