14 नवंबर को बाल-दिवस है। इस अंक में सारा बब्बर आपको जंगलों, जादुई फूलों, त्योहारों और कुछ अनोखे, अनदेखे जानवरों की दुनिया में ले चल रही हैं जिन्हें शायद आपने पहले कभी न देखा हो। इसमें कुछ गतिविधियाँ भी हैं जिनमें आप अपनी कल्पना का उपयोग करें और अपने आपको जिस भी प्राणी के रूप में देखना चाहें, देखें। अपनी सबसे गहरी इच्छाओं को जानें। आपके पास असीमित संभावनाएँ हैं। रचनात्मकता और प्यार के साथ हर दिन बाल-दिवस बन जाता है।
खेरेंगबार फूल - त्रिपुरा की एक लोककथा
एक समय की बात है, धनंजय नाम का एक आदमी था। कुछ समय काम करने के बाद, उसने गड़िया त्योहार मनाया। उसके बाद वह अपनी नई-नवेली पत्नी के साथ अपने गाँव के लिए रवाना हो गया। रास्ते में एक जंगल पड़ता था। उस जंगल से मनमोहक सुगंध आ रही थी।
उसकी पत्नी, सुमंत्रा, ने पूछा कि इतनी प्यारी खुशबू कहाँ से आ रही है। धनंजय ने बताया कि यह अद्भुत सुगंध खेरेंगबार पुष्प से आ रही है जो केवल सृष्टिकर्ता के लिए खिलता है। सुमंत्रा ने पूछा कि क्या वह अपने बालों में कुछ सुगंधित पुष्प सजा सकती है। धनंजय ने समझाया कि ये पुष्प केवल सृष्टिकर्ता के उपयोग के लिए हैं। तब, सुमंत्रा ने पूछा कि उसे यह सब कैसे पता है। धनंजय ने बताया कि उसने गाँव के दैरी (भविष्यवक्ता) से इन जादुई चीज़ों के बारे में सुना था।

सुमंत्रा ने पूछा कि अगर इंसानों ने इन पुष्पों का इस्तेमाल किया तो क्या होगा। धनंजय ने सुमंत्रा से उस पेड़ को ध्यान से देखने के लिए कहा जो धरती से अलग दिखाई दे रहा था। उसे स्वर्ग से एक अप्सरा अपने साथ लाई थी, जब वह पृथ्वी पर आई थी। चूँकि वह अप्सरा स्वर्ग से आई थी, इसलिए उसे वापस जाना पड़ा और अपना पसंदीदा पुष्प यहीं छोड़ना पड़ा। पुष्प तब से उसकी प्रतीक्षा कर रहा है और वह किसी और का नहीं होना चाहता।
यह सुनकर सुमंत्रा बहुत उदास हो गई। धनंजय ने कहा कि वह उसके लिए कुछ फूल तोड़ देगा, इसलिए वह खुश हो जाए। लेकिन धनंजय ने सुमंत्रा को चेतावनी दी कि वह उन्हें अपने बालों में न लगाए, वरना उसका अंजाम बुरा होगा। उसके खतरनाक अंजाम के बारे में सुनकर सुमंत्रा की आँखें भय और हैरानी से चौड़ी हो गईं। धनंजय ने बताया था कि ऐसा करने पर वह एक हूलॉक गिब्बन (लंगूर जैसा जानवर) बन जाएगा और सुमंत्रा एक पैंगोलिन (वज्रशल्क) बन जाएगी। यह सुनकर सुमंत्रा ने वादा किया कि वह फूलों को अपने बालों में नहीं लगाएगी।
धनंजय पेड़ पर चढ़ गया और उसने कुछ फूल तोड़े। जैसे ही फूल सुमंत्रा की गोद में गिरे, उसकी मनभावन खुशबू के कारण सुमंत्रा से रहा नहीं गया और वह उन्हें अपने बालों में लगाने की इच्छा को रोक नहीं पाई। जैसे ही उसने ऐसा किया, उसने देखा कि धनंजय की भुजाएँ बदलने लगीं। उसने जल्दी से फूल को बालों से निकाल दिया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उसने धनंजय को पुकारा, लेकिन सुमंत्रा को प्रत्युत्तर में केवल “हू-हू” की आवाज़ सुनाई दी। इससे पहले कि वह कुछ समझ पाती, वह खुद एक पैंगोलिन के रूप में बदलने लगी थी।
इस घटना से स्वर्ग में रहने वालों को बहुत दुख हुआ और इसी वजह से उन्होंने उस सुगंधित पुष्प को गंधहीन बना दिया ताकि भविष्य में किसी के साथ ऐसा न होने पाए।

उत्तर-पूर्वी भारत से कुछ तथ्य
हूलॉक गिब्बन भारत की एकमात्र वानर प्रजाति है। वे भारत, बांग्लादेश और चीन के मूल निवासी हैं। उन्हें अपनी “हू-हू” ध्वनि से यह नाम मिला है। उनके गीत मीलों तक सुने जा सकते हैं!
उत्तर-पूर्वी जनजातियों में भविष्यवक्ता होते हैं जिन्हें दिव्यदर्शी, संचारक, कथावाचक और धार्मिक विशेषज्ञ माना जाता है।
गड़िया त्योहार त्रिपुरा राज्य में धन और पशुधन के देवता गड़िया के सम्मान में मनाया जाता है।
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सारा बब्बर
सारा एक कहानीकार, मोंटेसरी सलाहकार और बच्चों की एक पुस्तक की लेखिका हैं। वे एक प्रकृतिवादी भी हैं और बाल्यावस्था में पारिस्थितिकी चेतना के विषय में डॉक्टरेट कर रही हैं। वे आठ वर्षों... और पढ़ें
