

चार मार्गदर्शक

लालाजी महाराज
1873 ई. - 1931 ई.फ़तेहगढ़ के श्री रामचंद्रजी, जिन्हें प्यार से लालाजी के नाम से जाना जाता है, हार्टफुलनेस परंपरा के पहले गुरु थे। उन्होंने यौगिक प्राणाहुति की प्राचीन कला को पुनर्जीवित किया ताकि अपने विकास में सच्ची रुचि रखने वाले सभी साधक चेतना के उच्चतम विस्तार का अनुभव कर सकें।
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बाबूजी महाराज
1899 ई. - 1983 ई.बाबूजी का जन्म 30 अप्रैल 1899 को उत्तर भारत के शहर शाहजहाँपुर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। कम उम्र से ही उनमें आध्यात्मिक बोध की लालसा थी जिसके सामने अन्य सभी रुचियाँ फीकी पड़ गईं। वे तीस वर्षों से अधिक समय तक शाहजहाँपुर की ज़िला अदालत में क्लर्क के पद पर रहे…
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चारीजी महाराज
1927 ई. - 2014 ई.श्री पार्थसारथी राजगोपालाचारी, जिन्हें चारीजी के नाम से भी जाना जाता है, का जन्म दक्षिण भारत के वयलुर (चेन्नई के पास) में हुआ था। चारीजी की सचेत आध्यात्मिक आकांक्षाएँ अठारह साल की उम्र में जागृत हुईं जब उन्होंने भगवद गीता पर एक व्याख्यान सुना लेकिन उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की…
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कमलेश डी पटेल
(1956 - वर्तमान)श्री कमलेश डी.पटेल प्राचीन परंपरा की मौलिक आवाज़ हैं। वे दाजी के नाम से प्रसिद्ध हैं। हार्टफुलनेस ध्यान पर उनकी शिक्षाएँ, उनके व्यक्तिगत अनुभव से उत्पन्न हुई हैं जो दुनिया की महान आध्यात्मिक परंपराओं और वैज्ञानिक…
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